जिला नागरिक अस्पताल में पिछले करीब दो महीने से सिर्फ कोरोना की ही चर्चा थी लेकिन गुरुवार दोपहर को पूरा परिसर खुशियों की किलकारी से गूंज उठा। अस्पताल में गांव कठवाड़ की महिला बलविंद्र काैर ने तीन बच्चों को जन्म दिया। तीनों ही बच्चे स्वस्थ हैं और वजन भी ठीक है। एक लड़के का वजन दो किलो और बाकी दो बच्चों लड़का व लड़की का वजन 1.5 किलो है। फिलहाल तीनों को नर्सरी में भर्ती किया गया। खास बात ये है कि महिला को बीपी और शुगर की प्रॉब्लम भी थी और खुद परिजन भी सिजेरियन की उम्मीद लगाए बैठे थे। महिला का ट्रीटमेंट पटियाला के अस्पताल से चल रहा था और उन्होंने भी परिजनों को सिजेरियन से ही बच्चा होने की बात कही थी, लेकिन गायनी विशेषज्ञ डाॅ. सोनाली ने सामान्य डिलीवरी कराने का फैसला किया और सफल भी रही। उन्होंने कहा कि ये मुश्किल था, लेकिन असंभव नहीं था। उन्होंने एनेस्थीसिया के डाॅक्टर को भी बुलाकर रखा था ताकि अगर सिजेरियन की जरूरत पड़े तो कोई समस्या न आए। उन्होंने बताया कि इस केस की अच्छी बात ये थी कि गर्भवती महिला के पेट में तीन बच्चे हैं। इसकी जानकारी पहले से थी, लेकिन समस्या ये थी कि महिला को बीपी व शुगर की समस्या थी और ऐसे गर्भवती हाई रिस्क की श्रेणी में आती हैं। महिला को पहला बच्चा भी सिजेरियन के जरिए ही हुआ था। ऐसे में चुनौती थी, लेकिन हम इसमें सफल रहे। इसमें परिजनों ने भी बहुत सपोर्ट किया। परिजनों को समझाया तो वे नॉर्मल डिलीवरी करवाने के लिए तैयार हो गए।
20 साल में ये पहला केस जब तीनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ | वर्तमान में एसएमओ के पद पर कार्य कर रही गायनी विशेषज्ञ डाॅ. रेनू चावला ने बताया कि मैं 20 साल से अस्पताल में सेवाएं दे रही हूं। इन सालों में मुश्किल से ऐसे दो या तीन केस ही आए होंगे, लेकिन इससे पहले कोई भी डिलीवरी इतनी सफल नहीं रही। या तो किसी बच्चे ने दम तोड़ दिया था या कोई न कोई समस्या हुई, लेकिन इस बार तीनों ही बच्चे स्वस्थ हैं और वजन भी बेहतर है।
32 सप्ताह में हुई डिलीवरी
महिला ने 32 सप्ताह में ही तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। डाॅ. सोनाली ने बताया कि दो दिन पहले ही महिला ने अल्ट्रसाउंड करवाया था, उसमें 32 सप्ताह की ही जानकारी थी। अमूमन गर्भवती महिला को स्वस्थ बच्चे को जन्म देने में 40 सप्ताह लगते हैं, लेकिन जुड़वा या तीन बच्चों के केस में ये समय कम ही रहता है।
किसी चमत्कार से कम नहीं: अशोक
महिला के पति अशोक कुमार ने बताया कि उनके लिए तो ये किसी चमत्कार से कम नहीं है। पहली लड़की छह साल पहले बड़े ऑपरेशन (सिजेरियन) से हुई थी। पटियाला में ट्रीटमेंट चल रहा था और वहां के डाॅक्टर ने भी बच्चे बड़े ऑपरेशन से ही होने की बात कही थी। डिलीवरी में समय बचा था, लेकिन बहुत ज्यादा तकलीफ होने पर वे सरकारी अस्पताल कैथल ले आए।
डिलीवरी करवाने वाली डाॅक्टर व स्टाफ इसके लिए बधाई के पात्र हैं। फिलहाल बच्चे व महिला स्वस्थ हैं। ऐसे संकट के समय में ऐसी सुखद घटनाएं बहुत जरूरी हैं।डाॅ. ओमप्रकाश, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल।
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