लॉकडाउन में ई-लर्निंग अच्छी लेकिन बच्चों को ओवरलोड न करें


कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन में स्कूल बंद हैं। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए लगभग सभी प्रमुख स्कूलों ने ऑनलाइन लेक्चर शुरू कर दिए हैं। क्लास वार वाट्सएप ग्रुप बने हैं। जिनमें पीडीएफ, वीडियो या ऑडियो के जरिये नोट्स दिए जा रहे हैं। बच्चे व्यस्त हो गए हैं लेकिन इस नए ऑनलाइन ट्रेंड के साथ कई तरह की दिक्कतें भी आ रही हैं। बहुत से अभिभावकों का कहना है कि स्कूल बच्चों को इतना काम दे रहे हैं कि बच्चे ओवरलोड हो रहे हैं। मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर पर घंटों बिताने से उनमें सुस्ती व चिड़चिड़ेपन की शिकायतें बढ़ गई हैं। पेरेंट्स बताते हैं कि बच्चे ज्यादा होमवर्क मिलने की शिकायतें कर रहे हैं। भास्कर ने अभिभावकों, टीचर्स व मनोविशेषज्ञों से समाधान को लेकर बात की।

अभिभावकों ने गिनाईं ऐसी दिक्कतें |

{ दो बच्चे हैं, उनमें मोबाइल को लेकर झगड़ा रहता है, दोनों का एक ही वक्त ऑनलाइन लेक्चर है।

{ हमारा डेटा पैक कम पड़ जाता है। नेट की स्पीड स्लो हो जाती है। सिग्नल सही न होने से टीचर्स की बात समझ नहीं आती।

{ अभी बच्चों के पास किताबें हैं नहीं।

{ बच्चे को यदि कोई टॉपिक समझ नहीं आता तो कैसे समझे।

{ क्लास वाला अनुशासन व एकाग्रता का माहौल नहीं बनता।

{ जिन अभिभावकों की तकनीकी नॉलेज कम, उनके लिए ज्यादा दिक्कत है।

एक्सपर्ट के स्कूलों को सुझाव |

1. अल्टरनेट डेज अॉप्शन- बच्चों को एक दिन होम वर्क या लेक्चर भेजें और एक दिन उन्हें यह काम नोट बुक में उतारने का मौका दें। इससे उनकी कॉपी भी तैयार होगी और वर्कलोड भी नहीं बढ़ेगा।

2. फीडबैक भी लें-टीचर्स ऑडियो या वीडियो लेक्चर भेज रहे हैं, इसमें बच्चों का भी फीडबैक लेना चाहिए कि क्या उन्हें ठीक से समझ में आ रहा है या नहीं।

एक्सपर्ट के पेरेंट्स को सुझाव:

1. बच्चे क्या कर रहे हैं, रोजाना चेक करें- पेरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों से पूछें कि आज उन्हें क्या कराया गया। बच्चों की नोट बुक तैयार कराएं ताकि जब स्कूल खुलें तो दिक्कत न आए।

2. बच्चों की दिक्कतें टीचर्स से शेयर करें- बच्चों को जो दिक्कतें आ रही हैं, वह उनसे जानें और टीचर्स से शेयर करें।

प्राइवेट स्कूलों की तरह अब सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा।

देखिए, ऑनलाइन स्टडी के लिए कम से कम 2-3 घंटे बच्चे को लगते हैं। अभिभावक के तौर पर मौजूदा समय में ये स्कूलों की तरफ से ये पहल सराहनीय है। लेकिन लंबे समय के लिए बच्चों के लिए ये प्रैक्टिकल नहीं है।
-अमन अग्रवाल, पालम विहार

सारा काम नेट पर आने लगा तो बच्चें सारा दिन मोबाइल या सिस्टम पर रहने लगे हैं। इससे बच्चों की आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है। हालांकि स्कूल बंद होने पर यह काफी मददगार है। पर डेटा का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। हमें डेटा की दिक्कत आने लगी है।
-शैली अग्रवाल, टिम्बर मार्केट

कोरोना वायरस के चलते फिलहाल ऑनलाइन स्टडी से बेहतर कुछ नहीं हैं। लेकिन अगर सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन रखते हुए अन्य कोई हल निकलता है तो बहुत अच्छा है। वैसे, कुछ पेरेंट्स इस नए तरीके को अपनाने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हैं।
-अजय कुमार गुप्ता, प्रधान, पेरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन

डॉ. अनुपमा सिहाग

} ई-लर्निंग या ऑनलाइन बच्चों को एनीटाइम-एनीव्हेयर स्टडी का देता है मौका : डॉ. अनुपमा

जीएमएन कॉलेज की साइक्लॉजी प्रोफेसर डाॅ. अनुपमा सिहाग बताती हैं कि ई-लर्निंग या ऑनलाइन टीचिंग या लर्निंग के फायदे हैं। इससे छात्र एनीटाइम-एनीव्हेयर अपने कॉन्सेप्ट को पढ़ कर क्लियर कर सकता है। अगर कोई ऑनलाइन लेक्चर मिस हो भी जाए तो उस कमी को दोबारा वीडियो देकर पूरा किया जा सकता है। लेकिन यूट्यूब, वाट्सएप, ऑडियो, वीडियो और वेबसाइट के माध्यम से होने वाली कक्षाओं का दोहरा असर देखने में आ सकता है। घर बैठे बच्चों से यह उम्मीद करना कि वे सेल्फ स्टडी कर लेंगे, मौजूदा समय में ये उम्मीद बेईमानी है। किशोर अवस्था की अगली कड़ी में ऑनलाइन कक्षाओं के लिए छात्र परिपक्व होते हैं। लेकिन भटकाव की अधिक संभावना रहती है। फिर भी खुद को संभालने की समझ उनमें पैदा हो चुकी होती है। लेकिन इसके उलट छोटे बच्चे की समझ कम होती है। इनके के लिए कोई भी टॉपिक या कॉन्सेप्ट को समझाने के लिए विभिन्न उदाहरणों का प्रयोग करना पड़ता है, जो ऑनलाइन टीचिंग में संभव नहीं है।

{ बच्चों में नेट सर्फिंग को मिलेगा बढ़ावा| ऑनलाइन स्टडी कहीं न कहीं बच्चों में नेट सर्फिंग की आदत को बढ़ावा देगा। इसके दूरगामी दुष्प्रभाव दिखाई दे सकते हैं जो इंटरनेट पर उपलब्ध अनावश्यक सामग्री की तरफ बच्चों का ध्यान आकर्षित करेगी। ऑनलाइन पढ़ना और पढ़ाना निर्जीव मालूम पड़ता है जबकि ऑफलाइन में शिक्षक हावभाव एवं बॉडी लेंग्वेज से विद्यार्थी में सार्थक ज्ञान दे सकता है। ऑफलाइन में शिक्षक पहले छात्र को पाठ्यक्रम की भूमिका के साथ पढ़ाई के लिए मानसिक रूप से भी तैयार करते हैं जो ऑनलाइन टीचिंग में संभव नहीं है।

{ लॉकडाउन के बाद बच्चे बोरियत फील करेंगे | ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों में अकेलापन होने के कारण चिड़चिड़ापन आ सकता है। साथ ही अभिभावकों के लिए नई परेशानी का कारण बन सकता है। इसके अलावा लॉकडाउन के बाद नियमित कक्षाओं में विद्यार्थी बोरियत महसूस करेंगे। शिक्षक की आवश्यकता एवं उसका मूल्यांकन भी कमजोर पड़ने की संभावना है।



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