कोविड-19 तथा लॉक डाउन के तहत घर से पढ़ाओ अभियान के तहत एबीआरसी व बीपीआर द्वारा तैयार की गई की ग्रांउड रिपोर्ट में सामने आया कि कही ठीक ठाक पढ़ाई हो रही है तो कही बच्चों के घर में टीवी, मोबाइल तक नहीं है। ऐसे में उन बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि विद्यालयों की छुट्टियां घोषित की गई हैं। कुछ स्टाफ को कार्यालय में आने के आदेश जारी किए गए हैं तो कुछ शिक्षकों व अन्य स्टाफ की फील्ड में कोविड-19 सर्वे की ड्यूटी लगाई गई है। कुछ शिक्षकों को बच्चों संग वाट्सएप ग्रुप बनाने के आदेश जारी किए गए थे। शिक्षकों ने अहम भूमिका निभानी थी, क्योंकि जिन बच्चों या परिजनों के पास एंड्रायड फोन था उन्हें जोड़ा गया। विभाग द्वारा अन्य बच्चों को टेलिविजन पर चैनलों के माध्यम से इन्हें देखकर शिक्षा ग्रहण करने की आदेश जारी किए, जिसका विवरण भी क्लस्टर के एबीआरसी, बीआरपी के माध्यम से बीआरपी से मंगवाया गया, लेकिन अब समस्या ये आ गई है कि जिन बच्चों के पास न मोबाइल है न ही घर में टेलिविजन है, वे शिक्षा से वंचित नजर आते हैं। भारती, अंजली, निधि, शीतल आदि ने बताया कि वे बिल्कुल गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। किसी रिश्तेदार का फोन आता तो वह भी पड़ोसियों के माध्यम से सुना जाता है। वहीं किसी के पास मोबाइल है तो वह एंड्रायड न होकर साधारण मोबाइल है जिस पर यह सुविधा नहीं है। ऐसे में पूरी तरह से यह व्यवस्था दुरुस्त होती हुई नहीं लग रही। स्कूली बच्चों व अभिभावकों की मानें तो विभाग को कुछ ऐसी प्रणाली अपनानी चाहिए जिससे शिक्षकों द्वारा दी जाने वाली रोजाना की शिक्षा, गृहकार्य बच्चों तक मुहैया हो सके।
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