126 साल में पहली बार नहीं निकलेगी जगन्नाथ रथयात्रा, मंदिर में करें दर्शन ; रथ यात्रा आज शहर में निकाली जानी थी, प्रशासन ने नहीं दी अनुमति

(गाेविंद सैनी)काेराेना वायरस की महामारी के कारण जगन्नाथ रथयात्रा पर जिला प्रशासन ने रोक के लगा दी है। यह यात्रा 23 जून को निकाली जानी थी। क्याेंकि यात्रा में हजाराें श्रद्धालु शामिल हाेते हैं, ऐसे में साेशल डिस्टेंसिंग का भी पालन हाेना मुश्किल है। इसके बाद जगन्नाथ मंदिर समिति ने फैसला लिया है कि वाे इस बार भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा नहीं निकालेंगे। ऐसा 126 सालाें में पहली बार हाेगा, क्याेंकि पिछले 125 सालाें से ये यात्रा हर साल निकाली जा रही थी।

1918 में आई महामारी, 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे और 1975 में लगी इमरजेंसी में भी ये यात्रा नहीं रुकी थी। उस समय भी रथयात्रा निकाली गई थी। मंदिर प्रधान राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि समिति के सदस्याें के साथ मिलकर मंदिर परिसर में ही परिक्रमा करने की याेजना बनाई जा रही है। इसके बाद आम श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं।

1894 में निकाली गई थी पहली यात्रा
प्रधान राजेंद्र ने बताया कि पानीपत के कई सदस्य 1890 में शहर के लाला बलदेव दास पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने गए थे। उन्होंने वहां की यात्रा में भाग लिया था। उससे प्रेरित हाेकर ही उन्हाेंने 1894 में पहली यात्रा शहर वासियों के लिए जगन्नाथ मंदिर से देवी मंदिर तक शुरू की। अब हर साल ये निकाली जा रही है। वहीं मान्यता है कि हर साल यात्रा से पहले बारिश जरूर हाेती है। आज तक हम भी देखते आएं हैं।

20 दिन पहले से शुरू हाेती थी तैयारियां
प्रधान राजेंद्र ने कहा कि हर साल भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारियां 20 दिन से भी पहले शुरू हाे जाती थी। इसमें मुख्य रथ हाेता था। बैंड बाजा, ढाेल, शंक सहित अन्य झांकियां भी हाेती थी। इस बार काेराेना की वजह से काेई तैयारी नहीं हाे पाई। वहीं फिर जिला प्रशासन ने इसे निकालने की अनुमति नहीं दी ताे समिति ने फैसला लिया कि अगर ये सबके हित में है ताे इस बार यात्रा नहीं निकालेंगे।

मंदिर में पुराने और नए दोनों रथ खड़े हैं
मंदिर में 1894 से लेकर लेकर 2002 तक 108 यात्रा पहले व पुराने रथ पर निकाली गई थी। पहले पत्थर की मूर्ति थी वाे विसर्जित कर दी गई थी। इसके बाद पूरी से ही नई मूर्ति लाई गई थी। 2003 से नए रथ यानी दूसरे रथ से यात्रा निकाली जा रही थी। मंदिर परिसर में पुराने व नए दाेनाें रथ खड़े हुए हैं। पिछले साल 5-6 हजार श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए थे।

2018 में स्वर्ण दरबार बनाया
मंदिर में स्वर्ण दरबार 2018 में बनवाया गया था। पहली बार स्वर्ण दरबार में विराजे भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर श्रद्धालु यात्रा में चले थे। साल 2000 में पत्थर का दरबार बनाया गया था, उसके बाद 2018 में 3 माह में 10 लाख की बर्क से भगवान जगन्नाथ काे स्वर्ण का रूप दिया गया था। 1918 में आई महामारी, 1947 में हुए बंटवारे और 1975 में लगी इमरजेंसी में इसे निकाला गया था। लेकिन इस बार यात्रा नहीं निकाली जा रही है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
1975 इमरजेंसी काल में भी निकाली गई थी जगन्नाथ यात्रा।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/314qO9y
via IFTTT