स्कूल बंद के कारण शिक्षा विभाग द्वारा घर से पढ़ाओं अभियान चलाया हुआ है। इसके तहत शिक्षकों द्वारा रोजाना बच्चों को मोबाइल से ग्रुप बनाकर वाट्सएप पर कार्य दिया जा रहा है तो टीवी के माध्यम से भी अध्ययन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। विभाग द्वारा शिक्षकों की डयूटी लगाई हुई है कि वे रोजाना बच्चों से व उनके अभिभावकों से फोन पर बातचीत करके उसका रिकार्ड रखें।
शिक्षकों द्वारा समय सारिणी बनाकर वाट्सएप पर बच्चों का काम दिया जाता है व बच्चों द्वारा काम करने पर उसकी चैकिंग की जाती है। कमी पाए जाने पर बच्चों को समझाया जाता हैं। शिक्षकों द्वारा काम दिए जाने पर अब विभाग ने जिम्मेवारी लगाई है कि शिक्षक बच्चों के पास फोन मिलाकर उनके गृहकार्य की जिम्मेवारी लें। इसके तहत स्कूल मुखिया भी 20-20 बच्चों से बातचीत करेंगे, वहीं विभाग ने बीआरपी, एबीआरसी, बीईओ, डीपीसी, एपीसी, डाइट सहित अन्य जिलाधिकारियों की अभिभावकों व बच्चों से फीडबैक की जिम्मेवारी लगाई हैं। लेकिन दैनिक मजदूरों के पास फोन आने पर ऐसे अभिभावक न तो मजदूरी कर पा रहे हैं और न ही उनकी समझ में आ रहा है कि विभाग उनके ही शिक्षकों की परीक्षा के साथ अभिभावकों की भी परीक्षा ले रहा है।
शिक्षकों के कंधों पर एक और बोझ डाला गया है जिन बच्चों के पास एंड्रॉइड मोबाइल के स्थान पर साधारण मोबाइल है उनके पास अध्यापकों को मैसेज करके गृह कार्य देना होगा। सबसे बड़ी दिक्कत शिक्षकों के लिए होगी की उन्हें सभी बच्चों के मोबाइल करने होंगे और सभी बच्चों के पास मैसेज करने होंगे। इसके साथ उन्हें पूरा रिकार्ड रखना होगा कि किस समय अधिकारी उनकी जांच कर लें। अभिभावकों की मानें तो शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों सहित अन्य संबंधित कर्मचारियों पर इतना बोझ डाल दिया है कि वास्तव में जो पढ़ाई होनी चाहिए वह नहीं हो पाएगी केवल कागजी कार्यवाही में ही सब कुछ सिमट कर रह जाएगा साथ में शिक्षकों पर दबाव अलग होगा।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3elhJwV
via IFTTT