एससीईआरटी प्रदेश के 1650 छात्रों से 31 प्रश्न पूछकर जानेगी दिमाग-शरीर पर कितना असर पड़ा

रेवाड़ी (अजय भाटिया).मोबाइल और इंटरनेट विद्यार्थियों को एडिक्ट (आदी) बना रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित हो ही रही है साथ ही उनके व्यवहार में भी बड़ा बदलाव आ रहा है। इस असर को जानने के लिए एससीईआरटी विद्यार्थियों पर शोध अध्ययन (रिसर्च स्टडी) कराएगी। इसके लिए शोध शुरू कर दिया गया है।

ये टीमें प्रदेश के सभी जिलों के चुनिंदा स्कूलों में जाकर 1650 से ज्यादा विद्यार्थियों पर रिसर्च करेंगी। रिसर्च में प्रत्येक विद्यार्थी से अलग-अलग तरह के 31 प्रश्न पूछे जाएंगे। 30 नवंबर तक यह कार्य पूरा कर एससीईआरटी के निर्धारित पोर्टल पर डाटा अपलोड किया जाएगा। डाटा विश्लेषण के बाद निष्कर्ष निकाला जाएगा, ताकि स्थिति को संभालने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम या अन्य जरूरी कदम उठाए जा सकें।


दरअसल एससीईआरटी द्वारा प्रदेशभर से स्कूलों का चयन कर उनमें रिसर्च स्टडी कराने के निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए एक निर्धारित प्रोफार्मा भी भेजा गया है। सर्वे के काम के लिए को-ऑर्डिनेटर भी नियुक्त कर दिए गए हैं। जो कि स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों से संवाद करते हैं तथा उनसे यह तय प्रोफार्मा भरवाएंगे। रेवाड़ी में भी यह सर्वे शुरू हो गया है। डाइट से कार्यक्रम को-ऑर्डिनेटर अनिल यादव के अनुसार सभी जिलों से कम से कम 5 स्कूलों का चयन किया गया है।


ये वो स्कूल हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या अच्छी है और छात्र और छात्राएं दोनों पढ़ते हैं। हर स्कूल से 10वीं और 12वीं कक्षा के 15-15 स्टूडेंट पर यह सर्वे किया जाएगा। रिसर्च के दौरान छात्रों से दो प्रश्नोत्तरी के माध्यम से उनके जवाब प्राप्त किए जा रहे हैं। दोनों सेट की प्रश्नोत्तरी में एक सेट में छात्रों के मोबाइल और इंटरनेट के प्रति दृष्टिकोण के बारे में 22 अलग-अलग प्रश्न पूछे गए हैं, दोनों सेट के माध्यम से छात्रों से 31 प्रश्नों के मल्टीपल चॉइस के आधार पर प्रश्न पूछे गए हैं।

इंटरनेट पर गलत साइट खुले तो क्या करते हैं?
सर्वे के दौरान विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति जानने संबंधित सवाल पूछे जाने हैं। इनमें सवाल हैं कि इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय यदि अचानक गलत साइट खुल जाए तो क्या करते हैं, बंद करते हैं या कुछ देखने के बाद बंद करते हैं। रोज कितनी देर मोबाइल इस्तेमाल करते हैं?, इंटरनेट इस्तेमाल करते समय मुझे कोई टोकता है तो मुझे गुस्सा आता है?, कोई अन्य काम करते समय भी इंटरनेट के बारे में सोचता हूं? इंटरनेट पढ़ाई से भटकाकर बातें, पोर्नोसाइट, सर्फिंग की ओर ले जाता है? जैसे सवाल पूछे जाएंगे।


अभिभावक बताएंगे मोबाइल के लिए बच्चे कितने जिद्दी
सर्वे में 660 शिक्षकों और अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा। स्कूल के 2 शिक्षकों से छात्रों पर इंटरनेट के प्रभाव संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। एक कंप्यूटर लैब इंचार्ज से भी प्रश्नावली भरवाई जाएगी। स्कूल मुखिया भी इंटरनेट के छात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव की प्रश्नावली भरकर देंगे। इसके अलावा दो अभिभावकों के भी विचार प्रश्नावली भरवाकर लिए जाएंगे। बताएंगे बच्चे मोबाइल के लिए कितनी जिद करते हैं। यह सर्वेक्षण प्रदेश के सभी जिलों के चयनित सरकारी स्कूलों में किया जा रहा है। सर्वेक्षण के बाद स्टेट लेवल पर एससीईआरटी में डाटा अपलोड कर विश्लेषण होगा। विश्लेषण के बाद छात्रों को इंटरनेट के दुष्प्रभावों से कैसे बचाया जाए उस पर रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके लिए नए प्रशिक्षण प्रोग्राम भी शुरू किए जा सकते हैं।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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