स्वास्थ्य मंत्रालय ने करनाल मॉडल को सराहा, 14 हजार परिवारों को ‘एडॉप्ट ए फैमिली’ के तहत लोगों ने लिया गोद

(रोहताश शर्मा)कोरोनावायरस से जंग में प्रशासन और शहर के लोग अच्छा काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने करनाल में “एडॉप्ट ए फैमिली’ के तहत राशन पहुंचाने की व्यवस्था की सराहना की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि करनाल में ‘एडॉप्ट ए फैमिली’ के तहत, 13000 जरूरतमंद परिवारों को 64 लाख रुपए की मदद दी जा रही है। मदद का आंकड़ा 70 लाख रुपए पार कर चुका है। इस व्यवस्था से जिले के दिहाड़ीदार और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को काफी फायदा पहुंचा है। लाॅकडाउन की घोषणा होने के अगले दिन करनाल जिला प्रशासन ने अधिकारियों की बैठक बुलाई, जिसमें सबसे बड़ा सवाल उभर कर आया कि जो लोग रोज कमाते हैं और शाम को उसी पैसे से राशन खरीदते हैं, ऐसे लोग 21 दिन कैसे अपने परिवार का पेट भरेंगे। ऐसे लोगों को लॉकडाउन के दौरान भूखाें मरने की नौबत आ जाएगी।

शहर के 500 लोगों ने किया सहयोग

डीसी निशांत कुमार यादव ने आदेश पर नगर निगम के कर्मचारी लगाकर पार्षदों के सहयोग से एक सर्वे कराया गया। इसमें 14 से 15 हजार जरूरतमंद परिवार मिले। करनाल प्रशासन ने परिवारों की पहचान करने के बाद 28 मार्च से “एडॉप्ट ए फैमिली” अभियान की शुरुआत की। इसके तहत कोरोना रिलीफ फंड में शहर के लोगों को दान करने की अपील की गई। शहर के करीब 500 लोगों ने इसमें सहयोग किया। इस फंड में अब तक 70 लाख रुपए आए हैं। विदेश में बैठे लोगों ने भी दान किया है। लोगोंं ने राशन भी दान किया।

श्रीप्रणामी स्कूल को बनाया क्लेक्शन सेंटर

जिस भी व्यक्ति को पैसा दान करना है, वह प्रशासन द्वारा दिए खाते में अपना पैसा डलवा सकता है, इसके अलावा श्रीप्रणामी स्कूल के कलेक्शन सेंटर पर राशन भी दान कर की व्यवस्था की गई। वहां पर राशन एकत्रित करने के बाद नगरपालिका के कर्मचारी और संस्था के लोगों के सहयोग से कट्टों में 20 से 22 किलोग्राम की किट तैयार की गई। इसमें आटा, चावल, दाल, सरसों का तेल, दूध पाउडर, साबुन और सभी मसाले डाले गए।

20 वार्ड के लिए बनीं 20 टीमें

शहर के 20 वार्डों में राशन बांटने के लिए 20 कमेटियों का गठन किया गया। पहचान किए गए परिवारों को राशन की किट बांटी गई। इसके अलावा कोई भी जरूरतमंद 1950 नंबर पर काॅल करके राशन मंगवा सकता है। इस नंबर पर एक साथ दस लोग बात कर सकते हैं। जहां से भी काॅल आती है, पहले टीम के सदस्य उस परिवार के पास जाकर जांच करते हैं।

इन लाेगाें काे बांटा राशन

लाभार्थियों में दैनिक वेतन भोगी , आवासहीन व्यक्ति, निर्माण कार्य में लगे मजदूर, रिक्शाचालक औरभिखारी शामिल हैं। इस सहायता का नाम एडोप्ट ए फैमिली यानी एक परिवार को गोद लें। ऐसे परिवार के लिए चावल, आटा, दाल, आलू, खाना पकाने का तेल, चीनी, सूखा दूध जैसी जरूरी खाद्य वस्तुएं उपलब्ध करवानी है।



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प्रतीकात्मक चित्र


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