गाेअभयारण्य में 2600 में से बचे हैं 250 पशु, सात माह में 2350 पशुओं की मौत

गाेअभयारण्य में गाेवंश के माैत का मामला थम नहीं रहा है। गाेअभयारण्य में अब केवल 250 के करीब गाेवंश बचा है। नवंबर 2019 में शुरू किए गाेअभयारण्य में पिछले सात माह में करीब 2350 से ज्यादा पशुओं की माैत हाे गई है। यानी हर माह गाेअभयारण्य में 342 से ज्यादा गायाें की माैत हाे गई। प्रतिदिन के हिसाब से आंकलन करें ताे हर राेज 11 से ज्यादा गायाें की माैत हुई है। लगातार गायाें के माैत के मामले में पहले ही सामाजिक व धार्मिक जनसंगठनाें ने इस मामले का विराेध किया था।

सामाजिक जनसंगठनाें ने इस दाैरान आराेप लगाया था कि गायाें की माैत निगम द्वारा ढंग से उनकी देखरेख न करने के कारण हाे रही है। इसके अलावा गर्मी सर्दी से बचाव के प्रबंध पूरे नहीं थे। लाेगाें ने ये भी आराेप लगाए थे कि निगम के पास पशुओं काे खिलाने के लिए चारे की व्यवस्था नहीं है। इसी कमी के कारण लगातार पशुओं की डेथ हाे रही है।

हालांकि निगम की तरफ से बताया गया कि इन पशुओं की माैत पाॅलीथिन खाने से हुई है। क्याेंकि सड़काें पर घूमने वाले इन पशुओं के पेट में पाॅलीथिन है जाे चारा खाते ही इन्हें बीमार कर रहा है और इनकी माैत हाे रही है।

एयरपाेर्ट की अड़चन खत्म करने के लिए अब धान्सूराेड नंदीशाला से गाेवंश काे किया जा रहा है शिफ्ट

नगर निगम अब गाेअभयारण्य में गाेवंश काे धान्सू राेड से शिफ्ट कर रहा है। वहां करीब 400 पशु हैं। इन्हें गाेअभयारण्य में हर राेज शिफ्ट करने का काम चल रहा है। जल्द ही यहां से सभी गाेवंश हटाया जाएगा। हालांकि अधिकारियाें का कहना है कि इस गाेवंश काे इसलिए शिफ्ट किया जा रहा है क्याेंकि एयरपाेर्ट के विस्तारीकरण में नंदीशाला की जगह अड़चन है।

यह जमीन एयरपाेर्ट काे दी जा चुकी है। ऐसे में निगम पर प्रशासनिक दबाव है कि इसे जल्द शिफ्ट किया जाए। मगर दूसरा पहलू ये भी है कि धीरे-धीरे गाेअभयारण्य में गाेवंश की माैत हाे रही है ऐसे में गाेअभयारण्य खाली हाे जाएगा। गाेअभयारण्य काे कहीं ताला न लग जाए इसके चलते अब इस नंदीशाला के पशुओं काे वहां भेजा जा रहा है।

50 एकड़ में फैला है गाेअभयारण्य
गाेअभयारण्य में नवंबर 2019 में गायाें काे शिफ्ट करने का काम किया गया था। निगम रिकाॅर्ड के अनुसार यहां करीब 2600 गाेवंश शिफ्ट किया गया था। हरियाणा के कृषि एवं पशुपालन मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने सितंबर 2016 में सिरसा रोड स्थित गांव ढंढूर में पशुधन फार्म की 50 एकड़ जमीन पर बनने वाले पहले गाेअभयारण्य की नींव रख दी।

3 फरवरी काे डाली थी याचिका
इस मामले काे लेकर वार्ड 15 से राकेश पंडित व राजीव सरदाना ने 3 फरवरी काे एडवाेकेट रमेश यादव के माध्यम से काेर्ट में जनहित याचिका डाली थी। फिलहाल इस मामले में 7 जुलाई की डेट थी। इसमें गाेसेवा आयाेग, पशुपालन विभाग, निगम कमिश्नर, डीसी हिसार व एनीमल वेलफेयर बाेर्ड के सचिव काे नाेटिस भेजकर जवाब मांगा गया था।

जनवरी में भास्कर ने की थी ग्राउंड रिपोर्ट

  • 11 जनवरी काे दैनिक भास्कर ने ग्राउंड रिपाेर्ट की थी, 700 से ज्यादा गायाें की माैत हाे चुकी थी।
  • खबर छपते के बाद सामाजिक संगठन गाेअभयारण्य पहुंचे और उन्हाेंने पशुओं की गिनती की ताे पशु कम मिले थे।
  • 12 जनवरी काे निगम ने पशुओं के शेड पर सर्दी से बचाने के लिए पर्दे इत्यादि लगाने शुरू कर दिए और व्यवस्था बनाने में जुटा। वहीं बाद में गद्दे दलिया और चारे की व्यवस्था के दावे किए गए थे।
  • गाेसेवा आयाेग के चेयरमैन व विधायक डाॅ. कमल गुप्ता ने भी गाेअभयारण्य का दाैरा किया।
  • 13 जनवरी काे पशुपालन विभाग के मुख्यालय ने वीकली रिपाेर्ट भेजने के निर्देश दिए। सामाजिक संगठनाें ने धरना दिया।

प्रदीप हुड्डा, डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर, नगर निगम ने कहा किधान्सू राेड की नंदीशाला से पशुओं काे गाेअभयारण्य में शिफ्ट किया जा रहा है। क्याेंकि एयरपाेर्ट काे यह जमीन दी जा चुकी है। इस जमीन काे खाली करने के लिए लगातार एयरपाेर्ट अथाेरिटी की तरफ से लिखा जा रहा है। एयरपाेर्ट के विस्तारीकरण में दिक्कत न हाे इसलिए इन पशुओं काे शिफ्ट किया जा रहा है।



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गो अभयारण्य में पशुओं के सामने पड़ा सूखा चारा।


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