गुरुबाणी के पाठ से गूंजने वाले गुरुद्वारों से अब जागरुकता का संदेश भी प्रसारित हो रहा है। गुरुद्वारों में सुबह-शाम होने वाले गुरुबाणी के पाठ के साथ ही कोरोनावायरस के खतरे व बचाव संबंधी हिदायतों की भी घोषणा हो रही है। गुरुद्वारों ने लॉकडाउन तक होने वाली परंपरा को बनाए रखने का प्रण लिया है। एसजीपीसी सदस्य जत्थेदार हरपाल सिंह मच्छौंडा ने बताया कि इस संकट की घड़ी में लोगों को जागरूक करना भी धार्मिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सभी 10 गुरुओं ने सुख व समृद्धि की कामना की थी। ऐसे में इस समय उनके स्वास्थ्य की देखभाल व उसके प्रति जागरुकता पैदा करना भी सिख परंपरा व कर्तव्य है। जत्थेदार मच्छौंडा ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की कि वे किसी भी तरह के लोक भलाई के काम के लिए गुरुद्वारों का प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों तक खाना व अन्य सुविधाओं के लिए भी प्रशासन गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से संपर्क कर सकता है। रेडक्रॉस सचिव ने मंजी साहिब गुरुद्वारे का दौरा कर वहां का निरीक्षण किया, ताकि जरूरत पड़ने पर आइसोलेशन केंद्र या दूसरी कोई सेवा ली जा सके। हरपाल सिंह मच्छौंडा ने काबुल में शहीद हुए सिखों को श्रद्धांजलि देते हुए इस कायराना हमले की निंदा की।
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