सरकारी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ 18-18 घंटे काम कर रहे, प्राइवेट डॉक्टर भी अपना धर्म निभाएं


काेराेना संक्रमण से लड़ने के लिए सरकारी अस्पतालाें के डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ युद्धस्तर पर जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कार्यालय स्टाफ की छुट्टियां तक रद्द कर दी हैं।

इस मोर्चे के फ्रंट पर लड़ने के लिए डॉक्टरों की अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं। ये डॉक्टर जहां बीमार लोगों की पहचान करने, क्वारंेटाइन करने व आइसोलेशन में रखकर इलाज करने के लिए 18 घंटे तक काम कर रहे हैं, वहीं हेल्पलाइन पर आने वाले सैकड़ों फोन भी सुन रहे हैं।

दिक्कत बढ़ रही क्योंकि प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से सामान्य मरीजों का दबाव भी सरकारी अस्पतालाें पर


मानवीय संकट की इस घड़ी में प्राइवेट अस्पताल बैकफुट पर चले गए हैं। जो अपनी रेगुलर ओपीडी तक नहीं चला रहे। इसकी रिपोर्ट सिविल सर्जन ने डीसी को दी। अब इन डॉक्टरों ने टेली मेडिसिन का फार्मूला निकाला है, जिससे टेलीफोन या वाट्सएप पर ही पेशेंट की हिस्ट्री पूछकर दवाई देते हैं। बताते हैं कि इसकी भी फीस रखी गई है। हालांकि, सिविल सर्जन आईएमए की स्थानीय इकाइयों से मीटिंग भी कर चुके हैं। डीसी ने प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों को नोटिस जारी कर इनका फर्ज याद दिलाने के साथ कानूनी कार्रवाई करने के लिए चेताया है। उन्हाेंने प्राइवेट डॉक्टरों को जरूरी पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट यानि पीपीई उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। वहीं, इनसे फिजिशियन व एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट की रिपोर्ट भी मांगी गई है। हालांकि, जिला प्रशासन की तरफ से कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए तैयार अस्पतालों की सूची में प्राइवेट व संस्थागत अस्पताल भी शामिल हैं। ऐसे अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड भी बनाए गए हैं लेकिन मुसीबत की इस घड़ी में इन अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से सामान्य बीमार मरीजों का दबाव भी सरकारी सेवाओं पर पड़ रहा है। वहीं, प्राइवेट अस्पताल संचालकों का तर्क है कि उनके पास इन दिनों पेशेंट 5 फीसदी ही आ रहे थे और गांवों से आने वाला पैरामेडिकल स्टाफ लॉकडाउन के चलते अस्पताल नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि, उनकी इमरजेंसी सेवाएं चल रही हैं।


डॉक्टर को भगवान का दर्जा... लेकिन ऐसे उदाहरण पेश न करें


{एक व्यक्ति की मां को दांत में दर्द था। जब वह उसे डेंटिस्ट के पास लेकर पहुंचा तो पहले उससे 200 रुपए मांगे गए। लेकिन डेंटल चेयर पर बिठाने के बाद 500 रुपए की डिमांड डॉक्टर ने रख दी। इतने पैसे व्यक्ति के पास नहीं थी। उसने सीएमओ को प्राइवेट डॉक्टर बारे बताया।

{एक महिला के पति को हार्ट में प्रॉब्लम हुई तो वह पति को सेक्टर-1 स्थित एक डॉक्टर के पास लेकर गई। वह डॉक्टर की कोठी का दरवाजा खटखटाती रही लेकिन किसी ने नहीं खोला। स्वास्थ्य विभाग को सूचित करने के बाद टीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी जांच की।



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