प्रदेश में गेहूं खरीद का कार्य तेजी पकड़ रहा है। दो दिनों में कुल 2.84 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। प्रदेश में जहां चार खरीद एजेंसियों को खरीद का कार्य सौंपा गया है। प्रदेशभर में खरीद के दूसरे मंगलवार को 1.82 लाख टन गेहूं खरीदा गया। वहीं, रोहतक समेत कई जिलों में आढ़ती अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर हड़ताल हैं। रोहतक में मंगलवार को भी कोई आढ़ती गेहूं खरीद प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ। रोहतक शहर की मंडी को छोड़ प्रशासन की ओर से अन्य मंडियों में गेहूं खरीदी गई। इनमें हैफेड, वेयर हाउस और एफसीआई ने किसानों से सीधे गेहूं खरीदी।
झज्जर-बहादुरगढ़ में काफी संख्या में आढ़ती हड़ताल से दूरी बना गेहूं व सरसों की खरीद में सहयोग कर रहे हैं।
हालांकि मंगलवार सुबह के सत्र में बेरी मंडी में खरीद नहीं हुई। अंबोली, तुंबाहेड़ी और सुबाना मंडी में बारदाना नहीं पहुंचने के कारण गेहूं खरीद का सुबह का सत्र बीत गया। सुबह आए किसानों की फसल शाम को खरीदी गई। कैथल अनाज मंडी गेहूं की खरीद तो हुई, लेकिन इस दौरान सोशल डिस्टेंस का ध्यान नहीं रखा गया। कलायत में हड़ताल के दौरान आढ़तियों ने खाली पीपे बजाकर प्रदर्शन किया। फतेहाबाद में ई-ट्रेडिंग के विरोध में मंगलवार को पूरे जिले में आढ़तियों व मजदूरों की हड़ताल रही। यहां 4 जगहों पर 4800 क्विंटल गेहूं सीधे एजेंसियों ने खरीदा। वहीं, व्यापार मंडल ने सभी आढ़तियों की बहियों को मार्केट कमेटी कर्मचारियों को सौंप दिया गया।
ऑनलाइन आईफार्म काटते वक्त आढ़त का ऑप्शन नहीं आया तो आढ़ती हुए एकजुट
कुरुक्षेत्र की मंडियों में दूसरे दिन भी तय शेड्यूल के तहत खरीद नहीं हुई। यहां अधिक संख्या में किसानों का मंडियों में पहुंचना जारी रहा। इधर, ऑनलाइन काटे जा रहे आई फार्म में आढ़त का कोई कॉलम न होने को लेकर हंगामा हो गया। आढ़तियों का आरोप था कि जब आढ़त का ऑप्शन ही नहीं है तो उन्हें आढ़त कैसे मिलेगी। शाम तक मार्केट कमेटी ने साॅफ्टवेयर की कुछ खामी थी, जो हेड क्वार्टर से दुरुस्त करवाई गई।
दोगुने से अधिक पहुंच रहे किसान
प्रदेश की मंडियों में इसमें से करीब 40 हजार क्विंटल की खरीद भी एजेंसियों को करनी पड़ी। इसी तरह मंगलवार को शाम तक 800 किसान मंडी में गेहूं लेकर पहुंच चुके थे। जबकि प्रशासन ने मंगलवार को थानेसर मंडी में 350 के करीब किसानों को मैसेज भेज बुलाया था।
आज से किसानों का गेहूं खरीदेंगे किसान
प्रदेश में दूसरे दिन 1.82 लाख टन गेहूं की खरीद हुई। दूसरे दिन साढ़े सोलह हजार किसानों से गेहूं खरीदा गया। अब सरकार ने जहां आढ़तियों द्वारा गेहूं की खरीद नहीं की जा रही है, वहां संबंधित एजेंसियों को सीधी खरीद करने के निर्देश दे दिए हैं। यही नहीं जो पंचायत या एफपीओ गेहूंखरीद करने में बिचौलिए की भूमिका निभाएंगी, उनके खाते में आढ़त की रकम भेजी जाएगी। अगर कोई सक्षम व्यक्ति या संस्था आढ़त के लाइसेंस के लिए आवेदन करता है तो डीसी उनको नियमानुसार लाइसेंस जारी कर सकते हैं।
दूसरी ओर आज से प्रदेश में किसानों का गेहूं किसान भी खरीद सकेंगे। सरकार द्वारा प्रदेश के 45 किसान उत्पादक संगठनों को लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। ये किसान उत्पादक संगठन सरकार के लिए गेहूं की खरीद करेंगे और इन्हें सरकार की ओर से वही कमीशन दिया जाएगा, जो आढ़ती को दिया जाता है। फिलहाल 45 उत्पादक संगठनों को लाइसेंस दे दिए गए हैं और जल्द ही 80 और किसान संघों को लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
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