(सुशील भार्गव)कोरोना महामारी में हरियाणा के बाशिंदे रोजाना पैसे, अनाज, भोजन आदि दान कर रहे हैं। ऐसे में युवाओं का जज्बा देखते ही बन रहा है। क्योंकि करीब साढ़े नौ हजार युवा रक्तदान के लिए आगे आए हैं। वर्तमान समय में सर्वाधिक रक्त की जरूरत थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों, गर्भवती महिलाओं, कैंसर रोगियों, हेमोफीलिया के रोगियों को अधिक है। इन दिनों में कॉलेज या विश्वविद्यालयों में रक्त कैंप लगाए जाते थे, लेकिन लॉकडाउन में सब बंद हैं। रेड क्रास ने समूचे प्रदेश में रक्तदान अभियान चलाया है। हरियाणा के रक्तदाताओं ने 25 मार्च से 25 अप्रैल तक 9493 यूनिट रक्त डोनेट दिया है।
यही नहीं दिल्ली से भी रक्त की मांग आई थी, हरियाणा ने बड़ा दिल दिखाते हुए दिल्ली को 100 यूनिट रक्त उपलब्ध कराया है। हिसार, रोहतक व यमुनानगर के युवाओं ने सबसे अधिक करीब 5200 यूनिट रक्तदान किया है। चूंकि अभी स्कूल कॉलेज व विश्वविद्यालय बंद हैं, इस कारण रक्त दान करने वालों की संख्या कम है। अमूमन हरियाणा में हर साल रेड क्रास के जरिए करीब दो लाख यूनिट रक्त एकत्र किया जाता है। प्रदेश में हर माह थैलेसीमिया से ग्रस्त करीब 850 और हेमोफीलिया से ग्रस्त 250 को करीब दो हजार यूनिट रक्त की दरकार होती है।
फिलहाल, 55 फीसदी रक्त की पूर्ति
लॉकडाउन में जितने रक्त की दरकार है, उसमें से 55 फीसदी की पूर्ति होने लगी है। अभी भी रक्त की कमी है और युवाओं को इसके लिए आगे आना होगा। सर्वाधिक मांग एबी पॉजीटिव व नेगेटिव, ओ ग्रुप के खून की है। रेड क्रास की ओर से बसें चलाई गई हैं, इन बसों में एक बार में दो युवा रक्त दान कर सकते हैं। फिलहाल प्रदेश में रेड क्रास के 7174 स्वयं सेवकों ने मोर्चा संभाला हुआ है।
40 मिनट में कोरोना के 16 सैंपलों की हो सकेगी जांच
अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों व लोगों के लिए एक और खुशखबरी है। अब केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक यूएसए से लुवास द्वारा मंगाई गई 16 लाख कीमत की अत्याधुनिक आरएनए मशीन से भी कोरोना के सैंपल की जांच की जा सकेगी।लुवास ने अश्व अनुसंधान केंद्र को उक्त मशीन दे दी है। मात्र 40 मिनट में 16 से अधिक सैंपल की जांच की जा सकेगी। हालांकि आरएनए से जांच के बाद अंतिम परिणाम पीसीआर मशीन से ही मिलेगा। इससे समय की भी बचत होगी। इससे वैज्ञानिकों का समय बचेगा। इसके अलावा एक और आरएनए व पीसीआर मशीन के लिए अधिकारियों को भी प्रपोजल भेजा है।
जल्द ही अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक अन्य आसपास के जिलों के कोरोना सैंपल की भी जांच कर सकेंगे। दरअसल, हाल ही में हिसार के अश्व अनुसंधान केंद्र को कोरोना के सैंपलों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। इसके लिए यहां के 16 से अधिक वैज्ञानिक और अन्य स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई थी। जिसमें संस्थान के निदेशक डॉ. यशपाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बीआर गुलाटी, डॉ. नितिन कुमार विरमानी भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार कोरोना की जांच के लिए पीसीआर मशीन तो अनुसंधान केंद्र के पास पहले से ही थी मगर आरएनए निकालने के लिए मशीन नहीं थी। इसके लिए उन्होंने लुवास से मांग की थी।
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