जनवरी के बाद अम्बाला में तब्लीगी जमातें बढ़ीं, अप्रैल में कैंट में मरकज की तैयारी थी


निजामुद्दीन मरकज से लौट कर अम्बाला की विभिन्न मस्जिदों में डेरा जमाने वाली जमातों की ट्रैवल हिस्ट्री और संपर्क में आए लोगों की लिस्ट तैयार की जा रही है। जिले में 84 मस्जिदों में नमाज अदा होती है। सभी मस्जिदें कैंट के चूना चौक पर स्थित जामा मस्जिद के अधीन हैं। इसलिए 10 मार्च को नेपाल, 11 मार्च को तमिलनाडु और 19 मार्च को महाराष्ट्र की जमात सबसे पहले जामा मस्जिद पहुंचीं थी। पुलिस ने जामा मस्जिद का रिकॉर्ड खंगाला तो सभी का एंट्री रजिस्टर में दर्ज मिली है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए तीनों जमात के 39 मौलाना के आधार कार्ड भी मांगे हैं। जनवरी से अम्बाला में जमातों का आना-जाना बढ़ गया था। अप्रैल में कैंट की मस्जिद में मरकज की तैयारी थी लेकिन लॉकडाउन हो गया। जनवरी में केरला और फरवरी में उत्तराखंड के ज्वालापुर से जमात आईं थी।

नेपाल की जमात बस में भारत आई थी। पहले निजामुद्दीन और फिर इलाकों से होकर अम्बाला कैंट पहुंची थी। जिसमें 8 सदस्य नेपाल से हैं और एक-एक असम, राजस्थान और श्रीलंका से हैं। 10 मार्च को जामा मस्जिद में रुकी और फिर टांगरी नदी में शिव कॉलोनी में चली गई। इसके एक दिन बाद तमिलनाडु जमात 11 मार्च को अम्बाला पहुंची और एक दिन जामा मस्जिद में रुकने के बाद रामकिशन कॉलोनी मस्जिद में रुकी थी। डिस्ट्रिक्ट क्वारेंटाइन कमेटी के इंचार्ज डॉ. राजेंद्र राय के मुताबिक सिटी में 13 मस्जिदें हैं। कमल विहार की बड़ी मस्जिद व मदरसे में गुजरात के गोदारा व यमुनानगर की जमात ठहरी थी। गुजरात के गोदरा की जमात 10 मार्च से 2 अप्रैल तक यहां रुकी थी। पुरानी सब्जी मंडी के पास मस्जिद तवक्कुल शाह में यमुनानगर की जमात 20 मार्च तक ठहरी थी। यहां एक जमात कुरुक्षेत्र के ठोल से आई थी। कोर्ट के पास स्थित मदीना मस्जिद में उत्तराखंड के ज्वालापुर वाली जमात भी रुकी थीं। जो कि जंडली मस्जिद में भी गई थी। चौड़ मस्तपुर के पास स्थित बडिंग गांव में सहारनपुर की जमात 15 मार्च तक ठहरी। अम्बाला से भी बिजनौर के लिए दो जमातें गई थीं। जो जमात जनवरी में गई थी वह फरवरी में लौटी थी और फरवरी में गई जमात मार्च में लौट आई थी।

एक ही रात रहती है

जामा मस्जिद से मौलाना अजहर काजमी ने बताया कि दिल्ली के निजामुद्दीन में भीड़ अधिक होती है इसलिए सिर्फ एक ही रात वहां पर कोई भी जमात रहती है। हमने सभी मस्जिद में इमाम को सूचित कर दिया था कि जुमे की नवाज के साथ-साथ पांच समय की नमाज काे बंद कर दिया जाए।

}पंजाब में जाकर फंस गई थी महाराष्ट्र की जमात : 19 मार्च को महाराष्ट्र के भिवंडी मस्जिद से 15 मौलाना निजामुद्दीन की बजाए सीधे अम्बाला में आए थे। जामा मस्जिद एक रात रहे और 20 मार्च को पंजाब के आलमगीर मस्जिद में चले गए। यहां से सभी ऑटो में गए थे। लेकिन 22 को लॉकडाउन हुआ तो जमात मस्जिद में फंस गई थी। इसलिए जामा मस्जिद से मौलाना अजहर काजमी और रामकिशन कॉलोनी से एक अलमारी कारोबारी आबिद आफताब उन्हें कार से लेकर अम्बाला ले आए थे। सभी जामा मस्जिद में रहें।

} मौलाना की शादी थी इसलिए पीछे से दो युवक कराते थे नमाज: टांगरी नदी में शिव कॉलोनी में मस्जिद के मौलाना मुहम्मद फैज की शादी थी इसलिए करीब डेढ़ माह से अपने बिजनौर में चले गए। पीछे से मस्जिद में रहने वाले दो युवकों की नमाज अदा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। दोनों युवक ही नेपाल जमात के संपर्क में थे।

नारायणगढ़ | गांव राउमाजरा की मस्जिद में बाहर तो पोस्टर लगा रखा था कि 22 मार्च से 16 अप्रैल तक घर से ही नमाज पढ़ें। जबकि मस्जिद में 23 मार्च से जमात को ठहराया गया।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Ambala News - haryana news tablighi groups grew in ambala after january there was preparation for mercury in cantt in april


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2wYaJW6
via IFTTT