अस्थियां लाॅकडाउन; हरिद्वार विसर्जन पर सीमा की सील, श्मशान घाट के लॉकर फुल तो मजबूरी में छत पर टांगे ‘फूल’

{ उत्तराखंड से बैरंग अम्बाला लौटना पड़ा

लॉकडाउन के 12 दिन में अम्बाला कैंट में 54 लोगों की अलग-अलग वजह से जान गई। रामबाग में संस्कार के बाद परिजन हरिद्वार में अस्थियां लेकर गए लेकिन हरियाणा-यूपी-उत्तराखंड बार्डर सील होने के कारण लौटा दिया गया। कैंट के रामबाग में अस्थियां रखने के लिए बने सभी 44 लॉकर फुल हो गए हैं तो मजबूरी में अस्थियों को छत पर लटकाया जा रहा है। बब्याल श्मशान घाट के सभी छह लॉकर फुल हुए तो कइयों के परिजन अपने लॉकर खरीद कर लाए।

हरिद्वार जाना टाल दिया | बब्याल के परमजीत कुमार ने बताया कि 90 वर्षीय दादी माया देवी की 25 मार्च को मौत हो गई थी। 27 को हरिद्वार जाने की अनुमति के लिए सीटीएम कार्यालय गए तो 15 अप्रैल तक एडजस्ट करने को कहा गया। ऑनलाइन परमिशन के लिए एसडीएम कार्यालय कैंट में अप्लाई कर दिया। एक व्यक्ति की परमिशन दी जा रही थी। परिवार से तीन लोगों को जाना था, इसलिए फिलहाल विसर्जन टला है।

दो बार वापस लौटाया, गांव के तीसरे रास्ते से हरिद्वार पहुंचे: - अम्बाला कैंट के सिकलीगर मोहल्ले के फकीरचंद ने बताया कि मां कृष्णा देवी का 3 अप्रैल को निधन हुआ। एसडीएम कार्यालय से तीन लोगों की परमिशन लेकर रविवार सुबह 5 बजे रामबाग से फुल चुनने के बाद सुबह 6 बजे हरिद्वार के लिए निकले। सहारपुर के बाद गुग्गाहेड़ी गांव के पास नाके ने सरकारी परमिशन भी नहीं मानी। दूसरे रास्ते से हरिद्वार के लिए निकले। 22 किलोमीटर दूर उत्तराखंड की सीमा से लौटा दिया। फिर गांवों से होकर हरिद्वार पहुंचे और फुल विसर्जित किए।

31 मार्च को मां कमला रानी का निधन हुआ था। एसडीएम कार्यालय से राजेश शर्मा, रविकांत शर्मा और मोहन कांत शर्मा के नाम हरिद्वार जाने की परमिशन मिली। यूपी बॉर्डर पर कलानौर पुलिस ने रोका तो परमिशन दिखा दी। लेकिन पुलिस ने एसडीएम कार्यालय की परमिशन को नहीं माना। पांवटा साहिब वाले रास्ते से हरिद्वार जाने लगे तो डीएसपी ने रोक लिया और हमें बैरंग वापस लौटना पड़ा।
- जैसा बब्याल निवासी तीनों भाइयों ने बताया।

{ सरसावां से पुलिस ने लौटाया

पिता हरि चंद का 24 मार्च को निधन हुआ था। एसडीएम कार्यालय से परमिशन ली। 25 मार्च को फुल लेकर हरिद्वार के निकल पड़े। जैसे ही हरियाणा यूपी का बार्डर क्रॉस किया और सरसावा पुलिस ने हमें वापस लौटा दिया।
- जैसा बब्याल निवासी बेटे चरणजीत ने बताया।

{ गांव में अस्थियां लौटी तो टाल दिया

पिता रामेश्वर का 27 मार्च का निधन हुआ था। परमिशन लेकर हरिद्वार जाने की तैयारी की तो पता चला कि वापस लौटाया जा रहा है तो अपना लॉकर खरीदकर श्मशान घाट में अस्थियां रखवाई हैं।
- जैसा बेटे पंकज ने बताया

रामबाग श्मशान घाट में लॉकर फुल होने पर छत पर लटकाई गई अस्थियां व कैंट के राम बाग श्मशान घाट में लॉकर जिनमें अस्थियां रखी हैं।



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