(सोमेश चौधरी)कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के खिलाफ सरकार, शासन और प्रशासन की ओर से लड़ी जा रही लड़ाई में जिले की महिला पुलिस के जवान भी किसी योद्धा से कम नहीं हैं। लॉक डालन को पालन कराने के लिए ये सभी सुबह जल्द ही अपनी अपनी ड्यूटी संभाल लेती हैं। किसी की ड्यूटी पर है तो किसी भी चौराहों पर। ये सभी अपने परिवार और बच्चों को माेह छोड़ बस कानून व्यवस्था के सही रखते हुए हर हाल में जनता से लॉक डाउन का पालन कराना ही इनका धर्म है।
फर्ज: परिवार से पहले है जनता से कानून का पालन कराना

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही। देश में लॉकडाउन किया है। इसलिए ये समय परिवार की चिंता करने का नहीं है। इस समय जो एक इंसान के नाते मेरी ड्यूटी बनती है सुबह से लेकर रात तक सड़कों पर घूमने वाले लोगों को घरों के अंदर रखना ही हमारी प्राथमिकता है। महामारी किसी से पूछ कर नहीं आती। ये कहना है महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर ब्रजबाला का। इस समय तो खाने तक का समय नहीं मिल पा रहा।
एक-दूसरे तक मैसेज पहुंचाना : कार्यालय का कार्य निपटाने में ही हो जाती है रात

सुबह 6 बजे से लेकर रात 11 बजे तक लगातार कार्यालय में कार्य करना पड़ता है। हर अफसर द्वारा तैयार की गई प्लानिंग के मुताबिक एक दूसरे तक मैसेज पहुंचाना और उच्चाधिकारियों के पास समय रहते रिपोर्ट भेजना अति अनिवार्य है। इस संकट की घड़ी में जरा सी देरी किसी बड़ी समस्या को उत्पन्न कर सकती है। इसलिए पूरे ध्यान के साथ अपनी ड्यूटी करनी पड़ती है। ये कहना है ऑफिस में एडमिनिस्ट्रेशन की पूरी जिम्मेदारी संभालने वाली एसआई सोनिया का।
आमजन को महामारी से बचाना : हर रोज 18 घंटे रहना पड़ता है फील्ड में

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन किया हुआ है। पुलिस की ड्यूटी बनती है कि वो जनता से कानून की पालना कराए। ताकि आमजन को इस महामारी से बचाया जा सके। सड़क पर फिजूल में घूमने वालों पर सख्ती दिखाना काफी जरूरी है। इसलिए अलग अलग सड़क मार्गों पर दिनभर बस ड्यूटी निभा रहे हैं। 18 से 19 घंटे फिलहाल ड्यूटी में ही समय बीत रहा है। ये कहना है 13 साल से पुलिस महकमे में नौकरी कर रही एएसआई अनूप का।
ड्यूटी निभाना बड़ी जिम्मेदारी: एक साल पहले ही पुलिस में हुई थी भर्ती

इस समय अपने सीनियर साथियों के साथ मिलकर ड्यूटी निभाना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बनती है। मुझे तो नौकरी करते हुए ही अभी एक साल हुआ है। अपने सीनियर से इस संकट की घड़ी में काफी कुछ सीखने काे मिल रहा है। बस हमारी ड्यूटी बनती है कि हम हर हाल में लोगों से लॉक डाउन की पालना कराएं। ये कहना है सिपाही माेहिनी का। परिवार के सभी सदस्य हमारा साथ दे रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान ड्यूटी देने में शुरू में तो थोड़ी बहुत तो हिचक हो रही थी, अब सब सही है।
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