कैंट के टूंडला, परेड व डिफेंस कॉलोनी के छोटे सब्जी विक्रेताओं ने धनिया, पालक, मैथी जैसी सब्जियों के बिक्री नियमों में राहत देने की मांग की है। इनका तर्क है कि यहां छोटे-छोटे किसान हैं, जिन्होंने एक से दो एकड़ जमीन 30 से 35 हजार में ठेके पर लेकर सब्जी उगाई। जिससे रोजाना 50 से 60 किलो सब्जी लेकर कैंट और सिटी की होलसेल मंडी में जाते हैं। कई बार मंडी से खदेड़ दिया जाता है। इसलिए पालक और मैथी की फसल फूल (पक) चुकी है। चूंकि, जमीन ठेके पर है इसलिए बीज बनने का इंतजार नहीं कर सकते। इसलिए फसल को खेत में ही नष्ट कर दूसरी फसल बिजाई करना मजबूरी है। इस एरिया में करीब 70 छोटे किसान हैं जिनकी आय का मुख्य साधन ही पालक-मैथी समेत अन्य सब्जियां ही हैं।
फसलें खराब हो रहीं, पशुओं को खिलानी पड़ेंगी
मेरे पास दो बेटियां, एक बेटा है। पत्नी के साथ मेरे पिता व भाई भी परिवार का हिस्सा है। लंबे समय से परिवार सब्जी का काम कर रहा है, इसलिए मैं भी यहीं काम करके परिवार चला रहा हूं। 30 हजार के ठेके पर एक एकड़ जमीन लेकर डेढ़ बीघे में पालक लगाया बाकी में धनिया, मैथी और फ्रांसबिन। मैंने डेढ़ बीघे में से आधा पालक ही बेच पाया हूं बाकी पालक पकने से खराब हो गया। इसलिए पशुओं को काट कर खिलानी पड़ेगी। मेरी दूसरी फसलें भी खराब हो गई।
रोजाना 50 से 60 किलो सब्जी लेकर मंडी जाते थे, कभी मंडी में दिक्कत आ रही हैं। कम से कम हमें पांच किलो पालक-मैथी, धनिया या अन्य सब्जी बेचने की अनुमति दी जाए। हम लोग बड़े किसान नहीं है। एक रेहड़ी विक्रेता की बिक्री भी ज्यादा नहीं होती है। इसलिए प्रशासन हमारी समस्या का समाधान करे। -जैसा डिफेंस कॉलोनी के छोटे किसान फतेह सिंह ने बताया।
- कोरोना वायरस के बीच हम परचून में पालक-मैथी को गुच्छी-गुच्छी करके बेचने देने की अनुमति नहीं दे सकते। थोक में बेचने पर किसी तरह की रोक नहीं है। जब मंडी के अंदर परचून में बेचते हैं तो कार्रवाई करनी पड़ती है। एसडीएम ने मंडी में सिस्टम बना रखा है, इस मामले में एसडीएम से बातचीत की जाएगी। रामकुमार दहिया, सचिव, मार्केट कमेटी कार्यालय अम्बाला कैंट
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