1402 श्रमिक उत्तर प्रदेश के लिए रवाना -भिवानी से 29 बसों 1130 श्रमिकों को व तोशाम से 7 बसें 272 श्रमिकों को उत्तर प्रदेश के लिए किया गया रवाना

रविवार को भिवानी व तोशाम से 36 रोडवेज बसों में 1402 प्रवासी मजदूरों को उत्तर प्रदेश के लिए रवाना किया है। रविवार सुबह सात बजे गुजरानी मोड़ के नजदीक एक आश्रम परिसर से रोडवेज की 29 बसों में 1130 प्रवासी श्रमिकों को एडीसी की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश के शामली, मथुरा, बागपत व सहारनपुर के लिए रवाना किया गया है। इससे पहले आश्रम में सभी मजदूरों की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मेडिकल जांच की और स्वास्थ्य संबंधित प्रमाण पत्र दिए। सभी मजदूर जिले में कृषि से जुड़े कार्य करते थे।
मेडिकल जांच व भोजन-पानी के साथ किया रवाना : रविवार को भिवानी से 29 बसों में 1130 श्रमिकों को व तोशाम क्षेत्र से 7 बसों में 272 श्रमिकों को यूपी के शामली, बागपत, मथुरा व सहारनपुर जिलों के लिए रवाना किया गया है। उचित प्रबंधों व व्यवस्था के लिए खुद एडीसी डॉ. मनोज कुमार, एसडीएम महेश कुमार, डीआरओ प्रमोद चहल व कोविड-19 के जिला कॉर्डिनेटर डॉक्टर राजेश कुमार मौके पर मौजूद रहे। सुबह सात बजे से बसों को उत्तरप्रदेश के लिए रवाना करना शुरू किया गया। सुबह दस बजे तक सभी बसें श्रमिकों को लेकर रवाना हो गईं।

ये कहना है अधिकारी का

एडीसी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि सरकार के आदेश पर कृषि से जुड़े श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें रोडवेज की बसों के माध्यम से उनके घर भेजा जा रहा हैं। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखा गया है। इन श्रमिकों को खाना व पानी की बोतल देकर रवाना किया गया है। एडीसी ने बताया कि जिन श्रमिकों ने अपने अपने घर जाने के लिए पंजीकरण करवाया है उन सभी को एक-एक कर भेजा जा रहा है।

तोशाम से 272 प्रवासी श्रमिक घर के लिए हुए रवाना

एसडीएम संदीप कुमार ने रविवार को बाबा मुंगीपा धर्मशाला से 272 प्रवासी मजदूरों को रोडवेज की सात बसों से उत्तर प्रदेश के लिए रवाना किया। एसडीएम ने बताया कि इन प्रवासी मजदूरों में अधिकतर बागपत, सहारनपुर, शामली, पीलीभीत, मथुरा और लखीमपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं।

लोहारू से पैदल चलकर परिवार के साथ प्रवासी श्रमिक भिवानी पहुंचे

उत्तर प्रदेश के गढ़ गंगा तहसील स्थित अपने गांव हसनुपर जाने के लिए लोहारू के गांव गिगनाऊ से परिवार समेत 18 श्रमिक पैदल चलकर रविवार दोपहर भिवानी पहुंचे। घंटाघर चौक पर पहुंचने पर श्रमिकों ने बताया कि वह फसल कटाई के काम से परिवार समेत दो महीने पहले आए थे अब फसल कटाई का काम पूरा हो चुका है लेकिन वापस जाने का उनके पास कोई साधन नहीं है। इसलिए वे पैदल ही अपने गांव जाएंगे। रजिस्ट्रेशन करवाने के संबंध में कहा कि वे अनपढ़ है और उन्हें रजिस्ट्रेशन के संबंध में पता नहीं है। श्रमिकों के साथ तीन साल से दस साल तक छह बच्चे भी साथ में थे।



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