हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ की साहा और बराड़ा कार्यकारिणी ने शुक्रवार को बीईओ को सीएम को नाम ज्ञापन सौंपा। जिला सचिव अशोक कुमार सैनी ने आरोप लगाया कि 2010 में नियुक्त 1983 पीटीआई के मामले में सरकार ने उचित पैरवी नहीं की। संघ ने मांग की है कि लगभग 68 याचिकाकर्ताओं को खाली पदों पर नियुक्ति देकर सभी को विभाग में रखा जाए। वैसे भी पूरे कोर्ट केस में एक भी नियुक्त टीचर दोषी नहीं पाया गया है। भर्ती एजेंसी दोषी पाई गई है। उसे ही 2000 जेबीटी भर्ती मामले की तरह सजा दी जानी चाहिए। सरकार को अपनी विधायी शक्तियों का प्रयोग करके सभी प्रभावित पीटीआई की सेवा सुरक्षा हर हाल में सुरक्षित रखनी चाहिए
अध्यापक संघ मांग ने मांग की है कि सरकार कोर्ट में बड़ी बेंच के समक्ष अपना पक्ष रखे कि भर्ती प्रक्रिया में चयनित अध्यापकों का दोष नहीं है। सरकार व्यापक शिक्षा और बेरोजगारी हित में जो याचिकाकर्ता पीटीआई पद की योग्यता एवं शर्तें पूरी करते हों। उन याचिकाकर्ताओं को खाली पड़े पदों पर नौकरी दे। भर्ती किए गए पीटीआई अध्यापकों की मृत्यु हो चुकी है और उनके परिवार एक्स ग्रेशिया के तहत अंतिम वेतन का लाभ ले रहे हैं। इन परिवारों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाएगा। अशोक कुमार सैनी ने कहा कि टेलीविजन व विभिन्न चैनलों के माध्यम से पढ़ाई धरातल पर पूर्णत: फेल है। यह केवल कागजों के पेट भरने व चहेतों को खजाना लुटाने की स्कीम है। जो अध्यापक सोशल मीडिया अर्थात यू ट्यूब व वाट्सएप के माध्यम से निशुल्क मेहनत कर रहे हैं। उनके प्रयास कुछ सार्थक हैं। जिला प्रेस सचिव लाभ सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री के बयान आ रहे हैं कि गर्मी-सर्दी की छुट्टियां कम कर दी जाएंगी एवं स्कूल समय बढ़ा दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री से मिलकर ऐसी गैर मनोवैज्ञानिक नीति का विरोध किया जाएगा।
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