रोक के बावजूद जलाए जा रहे गेहूं के फाने, बढ़ रहा प्रदूषण

लॉकडाउन के दौरान जो सबसे अच्छी बात रही थी वह थी प्रदूषण के स्तर में सुधार। लेकिन लॉकडाउन के तीसरे चरण में मिली छूट के बाद खुली औद्योगिक इकाइयों व साधनों के धुएं व किसानों द्वारा जलाए जा रहे गेहूं के फानों के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक में भारी बढ़ोतरी हो गई है। जो लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रही है। अर्थव्यवस्था के कारण औद्योगिक इकाइयों या साधनों को ताे बंद नहीं किया जा सकता लेकिन किसान गेहूं के फाने न जलाकर प्रदूषण स्तर में सुधार लाने में सहयोग जरूर कर सकते हैं। लॉकडाउन का पहला चरण 24 मार्च से शुरू हुआ था। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार 31 मार्च को वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 था।

जो लॉकडाउन के पहले व दूसरे चरण के दौरान लगभग अच्छे स्तर पर ही बना रहा। लेकिन लॉकडाउन के तीसरे चरण में मिली छूट से शुरू हुई औद्योगिक ईकाइयों व साधनों के धुंए से प्रदूषण स्तर बढ़ा। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से प्राप्त आंकडे के अनुसार रविवार को 11 बजकर 44 मिनट पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 138 पर था। जिला प्रशासन व सरकार की तरफ से बार-बार किसानों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे गेहूं के फानों काे आग न लगाएं। किसानों पर कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है लेकिन इसके बावजूद किसान फाने जलाने से बाज नहीं आ रहे। अधिकतर किसान रात के समय फानों में आग लगा रहे हैं।



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ढाणी हरसुख के खेतों में शनिवार रात को गेहूं के फानों में लगाई गई आग।


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