प्रदेश में पांच साल में 45 हजार यूनिट बढ़ा रक्तदान, पांच साल में 11.11 लाख यूनिट रक्त दान, आज 22 जिलों में लगेंगे कैंप

प्रदेश में पांच साल में 45 हजार यूनिट रक्तदान बढ़ा है। साल-दर-साल में इजाफा हो रहा है। सरकारी ब्लड बैंकों के अलावा अन्य ब्लड बैंकों में रक्तदान होता है। सबसे अधिक रक्तदान पिछले पांच साल में फरीदाबाद जिला में किया गया है। पिछले 5 साल में सबसे ज्यादा फरीदाबाद में 42,427 यूनिट रक्तदान किया है। यमुनानगर में 23,049 यूनिट, रोहतक में 27,063 यूनिट, सिरसा में 27,882, हिसार में 16,146 यूनिट रक्तदान पिछले पांच साल में किया गया है।

भारतीय रेड क्रास समिति हरियाणा के महासचिव डीआर शर्मा ने बताया कि वर्ष 2015 में 1.99 लाख यूनिट रक्तदान होता था, अब बढ़कर 2.44 लाख तक पहुंच गया है। लॉकडाउन के दौरान 30 हजार यूनिट से अधिक रक्तदान किया है।

धन दौलत से है बड़ा, रक्तदान का काज। जीव एक बचता कभी तो खुद पर होता नाज....रक्तदान सच में एक ऐसा महादान है जिससे खुद पर नाज करने का मौका मिलता है। आज वर्ल्ड ब्लड डोनर डे है। हमारे शहर में भी ऐसी बहुत सी संस्थाएं हैं जो रक्तदान के कार्य में जुटी हुई हैं और इनकी वजह से बहुत से लोगों को जीवनदान मिला है। हमने इन संस्थाओं से बात की और इनके प्रयासों को समझा।

शहीद भगत सिंह युवा मंडल संस्था: 15 सालों में लगाए 100 से ज्यादा कैंप
शहीद भगत सिंह युवा मंडल संस्था पिछले 15 सालों में 100 के करीब ब्लड कैंप लगा चुकी है। संस्था के सलाहकार और संयोजक नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा ब्लड कैंप लगाने वाली यह इकलौती संस्था है। नरेश शर्मा अकेले अब तक 67 बार रक्तदान कर चुके हैं वहीं संस्था की ओर से अब तक13 हजार यूनिट ब्लड इकट्ठा किया जा चुका है। इसके साथ ही 60 कैंप भारतीय आर्मी के लिए ऑर्गेनाइज किए गए। जिससे देश के जवानों को मुसीबत के समय ब्लड पहुंचाया जा सके।

सद्भावना संस्था: निगेटिव ब्लड ग्रुप के लोग जोड़ चला रहे मुहिम
सद्भावना संस्था के अध्यक्ष अमित ग्रोवर ने बताया कि निगेटिव ब्लड ग्रुप आसानी से न मिलने के कारण लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं एक्सीडेंट जैसी एमरजेंसी के दौरान भी निगेटिव ब्लड ग्रुप न मिलने की वजह से बहुत से लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। इसी वजह से सद्भावना संस्था की ओर से पिछले छह महीने से एक मुहिम के तहत निगेटिव ब्लड ग्रुप के लोगों को साथ जोड़ने का काम किया जा रहा है।

एक कदम जिंदगी की ओर संस्था: ब्लड ऑन डिमांड थीम पर कर रहे काम
एक कदम जिंदगी की ओर संस्था हर तीन से चार महीने में कैंप ऑर्गेनाइज करवाती है। यह संस्था ब्लड ऑन डिमांड थीम पर काम कर रही है। यानी जैसे ही इन लोगों के लिए एमरजेंसी कॉल आती है ये उसी समय ब्लड अरेंज करवाते हैं। अपनी थीम के कारण ये ज्यादा लोगों की मदद कर सकते हैं। संस्था के एक मेंबर ने बताया कि डेंगू जैसी बीमारी और एक्सीडेंट जैसे केसेज में अचानक से ताजे ब्लड की जरूरत होती है, इसी वजह से इन्होंने इस थीम के साथ खुद को जोड़ा। संस्था की कोशिश ज्यादा से ज्यादा लोकल डोनर को खुद से जोड़ना है।

रक्तदाता मित्रमंडल हिसार: अब तक 78 सौ यूनिट का कर चुके दान
रक्तदाता मित्रमंडल की शुरूआत सन् 2013 में तीन दोस्तों ने मिलकर की। इसके बाद धीरे-धीरे इसके काम से प्रभावित होकर शहर के अन्य लोग इससे जुड़ते चले गए। अब तक करीब सात हजार लोग रक्तदाता मित्रमंडल से जुड़ चुके हैं, वहीं 78 सौ यूनिट ब्लड इनकी ओर दान करवाया जा चुका है। खास बात ये है कि इस ग्रुप में कोई अध्यक्ष या अन्य किसी पद पर नहीं है। पूरा ग्रुप एक टीम की तरह सेवाभावना से काम करता है।

आस्था फाउंडेशन: साल भर में 52 ब्लड कैंप लगाने का है संकल्प
आस्था फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसीडेंट अमरदीप सिंह खालसा ने बताया कि आस्था फाउंडेशन इन दिन साल में 52 ब्लड कैंप लगाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। इसके तहत अब तक 9 ब्लड कैंप ऑर्गेनाइज भी हो चुके हैं। मगर लॉकडाउन की वजह से इनके काम में थोड़ी रूकावट आई है। लॉकडाउन के बीच भी संस्था की ओर से हरियाणा ब्लड बैंक और सर्वोदय ब्लड बैंक में कैंप ऑर्गेनाइज किए गए। अकेले अमरदीप ने ही 72 बार रक्तदान करके अनेकों लोगों को जिंदगियों को संवारा है।

इंसानियत फाउंडेशन: स्टूडेंट्स को ब्लड डोनेट के लिए कर रहे अवेयर
इंसानियत फाउंडेशन की ओर से संजू प्रजापति ने बताया कि रक्तदान के लिए लोगों का अवेयर होना बेहद जरूरी है। इसी वजह से वो अपनी फाउंडेशन की ओर से लोगों को ज्यादा से ज्यादा अवेयर करने का काम कर रहे हैं, जिससे लोग ब्लड डोनेशन से डरें नहीं बल्कि इसके लिए आगे आएं। इसी के साथ फाउंडेशन की ओर से अब तक 10 ब्लड कैंप भी ऑर्गेनाइज किए जा चुके हैं।

हिसार यूथ ब्लड डोनर: थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की कर रहे मदद
हिसार यूथ ब्लड डोनर की ओर से संदीप सैनी ‘मास्टर जी' ने बताया कि उनकी संस्था का मुख्य मकसद थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों तक ब्लड पहुंचाने का है। जिससे बच्चे इस खतरनाक बीमारी से उबर सके। यह संस्था तीन सालों से लगातार इस काम में जुटी हुई है। इसके साथ ही संस्था की ओर से महीन में दो बार ब्लड कैंप भी ऑर्गेनाइज किया जाता है। यह संस्था केवल जिले में ही नहीं अपितु बल्कि पूरे प्रदेश में जरूरतमंदों की सहायता के लिए काम कर रही है।



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रक्तदाता मित्रमंडल के सदस्य


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