प्रदेश शिक्षा निदेशालय (डीएसई) के स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) के आदेश को लेकर राज्य के सभी निजी स्कूल संघ ने विरोध जताया है। हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने प्रदेश सरकार को 25 जून तक एसएलसी पर अपने आदेश वापस लेने का अल्टीमेटम दिया है। निर्णय वापस नहीं होने पर प्रदेश स्तर पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। उससे पहले स्कूल संघ प्रदेश के हर जिले में जिले और ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी उपमंडल अधिकारी, उपायुक्त महोदय, एमएलए और एमपी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेगे।
बता दें कि 15 जून को डीएसई ने एक पत्र जारी किया था। इसमें छात्र को स्कूल छोड़ते हुए एसएलसी सर्टिफिकेट लेने की अनिवार्यता खत्म कर दी थी। हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने बताया कि प्रदेश स्तर पर हमने रोहतक के जीवन राम बसेशर लाल पब्लिक स्कूल में बैठक कर निर्णय लिया कि सरकार एसएलसी के निर्णय को वापस ले, अन्यथा 25 जून के बाद प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
50% अभिभावकों ने नहीं दी 3 महीने की फीस, आर्थिक संकट छाया
50% स्कूलों को तीन महीने में एक भी पेरेंट्स ने नहीं दी फीस: सत्यवान कुंडू, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने कहा कि सत्यवान कुंडू ने बताया कि प्रदेश में करीब 20 हजार छोटे-बड़े स्कूल हैं। हमने सर्वे में पाया प्रदेश भर में करीब 50% स्कूलों अप्रैल, मई और जून में एक भी अभिभावकों ने फीस नहीं दी और 40% स्कूलों को केवल 7% अभिभावकों ने ही फीस दी है। इससे स्कूलों को आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
इन निजी स्कूलों में 10 से 12 लाख की संख्या में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ कार्यरत हैं। इनके परिवारों के लगभग 45 लाख सदस्य हैं जिनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। प्राइवेट स्कूलों के सरकार को आर्थिक पैकेज का ऐलान करना चाहिए। वहीं इस कठिन समय में 134ए के तहत पढ़ने वाले छात्रों की फीस गत 4 वर्षों से नहीं दी है। अगर सरकार भुगतान करती है तो हम अपने अध्यापकों की सैलरी दे सके।
नए नियम से एमआईएस पोर्टल हो जाएगा फेल
रमेश बंसल, प्रवक्ता, हरियाणा निजी स्कूल संचालक संघ ने कहा कि सरकार के नये नियम से एमआईएस (मैनेजमेंट इनफॉर्मेशन सिस्टम) पोर्टल फेल हो जाएगा। क्योंकि इससे स्कूल प्रबंधन को पता ही नहीं चलेगा कि उसके यहां के छात्र ने दूसरे स्कूल में दाखिला ले लिया है। नए नियम के बाद एक ही छात्र का नाम दो स्कूलों के एडमिशन रजिस्टर में दर्ज होने की संभावना है। क्योंकि अब एसएलसी के बिना ही दूसरे स्कूल में दाखिला मिल जाएगा।
मौजूदा समय में जिले में 200 से ऊपर निजी स्कूल हैं। पहले सरकार ने स्कूल फीस लेने के लिए दबाव न डालने की बात कही थी।अब नया नियम बना दिया है। अब छात्र बिना फीस दिए ही दूसरे स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं। हम टीचर्स को फीस कहां से दे।
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