जिसमें उन्होंने बताया कि उस समय उनके राज्य में लगभग एक लाख अग्रबंधु परिवार रहते थे। जब भी कोई अन्य राज्य से उनके राज्य में व्यापार करने या रहने के उद्देश्य से आता तो प्रत्येक अग्रवाल परिवार द्वारा एक रुपया व एक ईट का सहयोग करने की परम्परा अग्रसेन जी द्वारा रखी गई, जिससे कोई भी भारी व्यक्ति के पास आते ही व्यापार करने को एक लाख रुपया नकद व एक लाख ईंट से अपना मकान बनाने की सुविधा हो जाती थी। इससे जरूरतमंदाें काे बड़ी मदन मिलती थी। उन्होंने कहा कि हम बेटियों की शादी करें तो वर पक्ष की तीन चीज जरूर देखें, जिसमे पहले पूर्ण परम्परा को देखना, दूसरे स्थान पर धन सम्पत्ति को देखना चाहिए और तीसरे नम्बर पर वर के रंग रूप को देखना चाहिए। आज सब उल्टा हो रहा है। हम विवाह के समय रंग रूप को देखते हैं। इसलिए हमारे परिवार टूट रहे हैं। वही उन्होंने गुरु और मातापिता के आशीर्वाद पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर एड हॉक कमेटी के प्रधान पवन सुगला, बुध किशोर मित्तल, देवराज तोसामिया, पीडी अग्रवाल, पुरुषोत्तम दास, सीताराम, रामकिशोर, संजय अग्रवाल, एडवोकेट सचिन अग्रवाल, अजय गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, प्रेम प्रकाश, सुरेश डिब्बे वाला, अशोक बुवानी वाला, हरिराम, सुरेश, रामदेव तायल, प्रीतम अग्रवाल, प्रवीण कोकड़ा, रामनिवास, सुमित खेमका, राजेश सुगला, नरेश गर्ग, अशोक सिंगला, वेद प्रकाश गुप्ता आदि मौजूद थे।
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