डेयरियों के लिए चाहिए 30 एकड़ की जमीन, जगह न होने के कारण शहर में ही लगाए जा रहे गोबर के ढेर


कैंट से डेयरियों व ग्वाल मंडियों को बाहर करने की योजना पर ब्रेक लग गया है। जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है। कैंट में डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए पूर्व में कई योजनाएं तो बनी, मगर इन्हें पूरा नहीं किया जा सका। अब अलग-अलग बाजारों व स्थानों पर डेयरियां है। जगह नहीं होने के कारण ग्वाले शहर के बीच ही गोबर खुले में फेंक रहे हैं।

कैंट में इस समय करीब 280 के लगभग डेयरियां है। रामबाग रोड पर सबसे बड़ी ग्वाल मंडी है। इसी तरह रेजिमेंट बाजार में ग्वाल मंडी है, लालकुर्ती में ग्वाल मंडी, दुधला मंडी, तोपखाना बाजार, सेवा समिति चौक, बीडी फ्लोर मिल क्षेत्र में ग्वाल मंडी है। इसी तरह सेना क्षेत्र में तोपखाना में भी ग्वालमंडी है। रामबाग रोड व अन्य मंडियों में गोबर घरों के व सड़कों किनारे फेंका जा रहा है। नप ने खोजकीपुर, ब्राह्मण माजरा, करधान, रामपुर सरसेहड़ी, कलरहेड़ी आदि स्थानों पर जगह भी देखी, मगर 25 से 30 एकड़ जमीन विभाग को नहीं मिली है। बता दें कि पूर्व में वर्ष 2010 में उगाड़ा में भी डेयरी शिफ्टिंग के लिए योजना बनी थी, मगर यह स्थान दूर होने की वजह से डेयरी संचालकों ने वहां जाने से इंकार कर दिया था।

इन विकल्पों पर भी विचार: डेयरियों के लिए जगह नहीं मिलने के कारण नप अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। अब नप शहरी सीमा से बाहर के गांवों में भी जमीन तलाश रहा है। या फिर छोटी-छोटी डेयरियां 3-4 अलग-अलग स्थानों पर बनाई जा सकती हैं।

लावारिस पशुओं के बाड़े की जगह भी नहीं

शहर की सड़कों पर दौड़ रहे लावारिस पशुओं को पकड़ने की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई है। बीते वर्ष अगस्त में नगर परिषद ने पशु पकड़ने का कांट्रेक्ट भी अलॉट किया था। मगर तीन या चार बार ही पशुओं को पकड़ गाेशाला में छोड़ा गया। रामबाग गाेशाला में जगह नहीं है जबकि टंगैल व सुल्लर गाेशाला में चारे के लिए व्यापक राशि व प्रबंध न होने से यहां पशुओं को नहीं भेजा जा रहा है।

25 से 30 एकड़ जमीन की डेयरियों के लिए चाहिए। शहरी सीमा में इतनी जमीन उपलब्ध नहीं है। विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
राजेश कुमार, सचिव, नगर परिषद सदर।

बीसी बाजार ग्वाल मंडी के साथ फेंका गया गोबर व लावारिस पशु।



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Ambala News - haryana news 30 acres of land needed for dairies cow dung being planted in the city due to lack of space


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