मार्च में करें अमरूद के बागों की विशेष देखभाल, कीट व बीमारियां के लगने का रहता है खतरा


जिले में सबसे ज्यादा बाग अमरूद के हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि अमरूद हर प्रकार की मिट्टी व जलवायु में फलने-फूलने की क्षमता रखता है। अमरूद में कीट व बीमारियां काफी नुकसान पहुंचाती हैं। अच्छी पैदावार के लिए एक से दो साल के पौधों में फरवरी माह में 10 किलो गोबर की खाद, 200 ग्राम यूरिया, 400 ग्राम सुपर फास्फेट तथा 100 ग्राम पोटेशियम सल्फेट तथा पांच-दह साल के पौधों में 50 किलो गोबर की गली-सड़ी खाद, 600 ग्राम यूरिया, 1200 ग्राम सुपर फास्फेट तथा 500 ग्राम पोटेशियम सल्फेट प्रति पौधा डालनी चाहिए।

मार्च में पौधों पर 0.3 प्रतिशत जिंक सल्फेट का छिड़काव करें

उक्ठा रोग (बिल्ट) लगने पर पत्तियां पीली पड़ कर झड़ जाती हैं। रोकथाम के लिए पौधों के चारों तरफ पानी इकट्ठा न होने दें। भारी मिट्टी में अमरूद के बाग न लगाएं। मार्च में पौधों पर 0.3 प्रतिशत जिंक सल्फेट का छिड़काव करें। कीट की सुंडी तने में घुसकर खुराक नली को नष्ट कर देती है। इसकी रोकथाम के लिए दो मि.ली. नुवान (डाइक्लोरोवास 76 ई.सी.) दवा को 10 लीटर पानी में मिलाकर रूई के फोहों को दवा में डुबाकर किसी धातु के तार से कीटों के सुराख के अंदर डालकर, सुराब को गीली मिट्टी से बंद कर दें।


कब-कब करें सिचाई

10 से 15 दिन के अंतराल पर सिचाई करते रहें। फूल पड़ने पर व फूल लगने के दौरान सप्ताह में सिचाई अवश्य करें। वर्षा ऋतु की फसल न लेनी हो तो फरवरी के मध्य व मई तक सिचाई बंद कर दें।

फलों को अधपकी दशा में ही तोड़ लेना चाहिए

फरवरी के अंतिम सप्ताह में सर्दी कम होने पर पाले से बचाव के लिए लगाया छप्पर या शेड छोटे पौधों से हटा देना चाहिए। तोड़ाई एक या दो पत्ते रखकर करनी चाहिए। फलों को अधपकी दशा में ही तोड़ लेना चाहिए।
- डॉ. महावीर सिंह मलिक, कृषि विशेषज्ञ।



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Palwal News - take special care of guava orchards in march there is a danger of pests and diseases
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