अम्बाला में बाहर से आई जमातें, फिर कई मस्जिदों में घूमी


डिस्ट्रिक्ट क्वारेंटाइन कमेटी के इंचार्ज डॉ. राजेंद्र राय ने बताया कि अभी तक की ट्रैवल हिस्ट्री से पता चला है कि अम्बाला में कई जमातें आई हैं। इनमें तमिलनाडु की जमात में 10 लोग हैं। जो 10 मार्च को निजामुद्दीन से अम्बाला नॉन एसी ट्रेन में आई थी। यह जमात कैंट की टिंबर मार्केट की जामा मस्जिद में ठहरी। महाराष्ट्र वाली जमात में 15 सदस्य हैं। जो 17 मार्च को आए और रामकिशन कॉलोनी में ठहरे हैं। ये भी नॉन एसी ट्रेन से आए। उसके बाद आटो से आगे जामा मस्जिद पहुंचे। अगले दिन पंजाब के आलमगीर में गए और 3 दिन रूकने के बाद वापस आ गए। एक नेपाल वाली जमात टांगरी वाली मस्जिद में है। जिसमें कुल 11 में से 8 नेपाल के और श्रीलंका-असम व राजस्थान के एक-एक सदस्य हैं। राजस्थान से जमात जोधपुर से 10 मार्च को निजामुद्दीन आई थी। 11 मार्च को इन्हें नेपाल वाले मिल गए। उसके बाद अम्बाला कैंट की जामा मस्जिद में रहे। 4 दिन जंडली में भी रुके थे। इनमें से एक बुजुर्ग ऐसा है जो सितंबर 2019 से लगातार सफर कर रहा है। वह कभी निजामुद्दीन, कभी अलीगढ़, बागपत (यूपी), मेवात और निजामुद्दीन गया और फिर अम्बाला कैंट में रहा। जंडली में उत्तराखंड के ज्वालापुर से भी एक जमात आई और छह दिन रुककर गई जोकि 27 मार्च को प्राइवेट वाहन से ज्वालापुर पहुंच गई। अम्बाला की 4 जमातें गई हुई हैं। 13 फरवरी को गुजरात के गोदरा के लिए निकली एक जमात 19 मार्च को लौटकर आई है। इसमें जलूबी गांव से 5, सबका गांव से एक, नगला के चार व लंडा गांव के दो लोग थे। पेट में दर्द की शिकायत होने पर इनमें से एक रास्ते में से ही वापस आ गया था। डॉ. राय ने बताया कि पंजाब के आलमगीर, उत्तराखंड के ज्वालापुर के स्वास्थ्य प्रशासन को भी सूचना दे दी गई है, ताकि क्वारेंटाइन किया जा सके। ट्रैवल हिस्ट्री होने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। लोगों से अपील है कि जो आसपास कहीं ठहरे हैं उनके बारे सूचना विभाग को दें, उनके नाम गुप्त रखे जाएंगे। िनजी वाहन चालक ऐसे लोगों को छोड़ने सहयोग न करें।



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