मां कालराित्र की कहानी और पूजा का क्या है महत्व


पूजा का विधान...

मां का सरल मंत्र ॐ क्रीं कालिकायै नमः है। मां काली शक्ति संप्रदाय की सबसे प्रमुख देवी हैं, जिस तरह संहार के अधिपति शिव जी हैं उसी प्रकार संहार की अधिष्ठात्री देवी मां काली हैं। मां काली की पूजा करने से मां भक्तों के सभी कष्टों को हरती है अौर सुख बरसाती है।

मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय-जय-महाकाली।

काल के मुह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।

महाचंडी तेरा अवतार॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।

महाकाली है तेरा पसारा॥

खडग खप्पर रखने वाली।

दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।

सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।

गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा।

कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी।

ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें।

महाकाली मां जिसे बचाबे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।

कालरात्रि मां तेरी जय॥

आज सातवां नवरात्र

यह कटिंग घर में रखकर पूजा करें

छोटा त्रिलोकपुर की शारदा माता, रायपुररानी

मां को प्रिय है लाल और काली वस्तुएं


नवरात्र : मंदिर बंद हैं, घर में रहते हुए माता के स्वरूपों के दर्शन कीजिए भास्कर में

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। देवी कालरात्रि का स्वरूप बहुत विकराल है। इनके मस्तक पर शिवजी की तरह तीसरा नेत्र है। तीसरा नेत्र हमारे अंतर्मन का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार तीनों लोकों में शुंभ निशुंभ और रक्तबीज तीनों राक्षसों ने आतंक मचा रखा था। इससे परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव के पास इस समस्या के समाधान के लिए पहुंचे। तब भगवान शिव ने मां आदिशक्ति से उन तीनों का संहार करके अपने भक्तों को रक्षा करने के लिए कहा। इसके बाद माता पार्वती ने उन दुष्टों के संहार के लिए मां दुर्गा का रूप धारण कर लिया। मां ने शुंभ और निशुंभ से युद्ध करके उनका अंत कर दिया लेकिन जैसे ही मां ने रक्तबीज पर प्रहार किया उसके रक्त से अनेकों रक्तबीज उत्पन्न हो गए। यह देखकर मां दुर्गा ने कालरात्रि का रूप धारण कर लिया। इसके बाद मां कालरात्रि ने रक्तबीज पर प्रहार करना शुरु कर दिया और उसके रक्त को अपने मुंह में भर लिया और रक्तबीज का गला काट दिया। मां का शरीर रात से भी ज्यादा काला है।

मां का सप्तम रूप कालरात्रि है। मां काली की उपासना में लाल और काली वस्तुओं का विशेष महत्व होता है। मां कालरात्रि की पूजा में लाल कुमकुम, अक्षत, गुड़हल के लाल फूल और भोग में हलवे या दूध से बनी मिठाई भी अर्पण करें। इच्छा पूर्ति करने के लिए मां काली के सामने बैठकर दुर्गा सप्तशती का पाठ भी लगातार सात दिन तक करना चाहिए।



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