{ सीबीएसई ने एक साल पहले हर जिले में हब्स ऑफ लर्निंग बनाने का दिया था निर्देश
कोरोना वायरस की बढ़ती महामारी ने स्कूली शिक्षा को भी प्रभावित किया है। लेकिन कोरोना महामारी फैलने से करीब एक साल पहले सीबीएसई की तरफ से हब्स ऑफ लर्निंग (एचओएल) की पहल ने एजूकेशन पर इसके पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक कम किया है। एचओएल के चलते ही स्कूलों को छात्रों के लिए विभिन्न विषयों से जुड़े वीडियो लेक्चर तैयार करने में मदद मिली है।
बीपीएस स्कूल के प्रिंसिपल प्रवीण कुमार ने बताया कि देश 21 दिनों के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है, न जाने अभी यह कितना लंबा चले। लेकिन सीबीएसई की तरफ से एचओएल की शुरूआत ने कोरोना से छात्रों को होने वाले नुकसान से बचा लिया है। क्योंकि हब्स ऑफ लर्निंग स्कूल के तहत आने वाले स्कूलों में निर्धारित किए गए विषय को लेकर वीडियो लेक्चर तैयार किए गए जा रहे हैं। इस हब में भारतीय पब्लिक स्कूल भी शामिल है।
क्या है हब्स ऑफ लर्निंग | मार्च, 2019 को सीबीएसई ने एक सर्कुलर जारी किया था। इसके मुताबिक सीबीएसई ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में 4-6 स्कूलों की पहचान करने का निर्णय किया, जिसे हब्स ऑफ लर्निंग कहा जाता है।
अध्यापक टीचर के रेशो और स्कूल रिजल्ट के आधार पर सीबीएसई खुद एक स्कूल को दो साल के लिए लीड कोलोब्रेटर स्कूल चुनेगा। 2 साल बाद आपसी समझ के आधार पर दूसरा स्कूल इस भूमिका में आ जाएगा। महीने में एक बार इस ग्रुप की मीटिंग अनिवार्य है। एचओएल के तहत हर स्कूल दिए गए विषय को लेकर वीडियो लेक्चर तैयार करेगा जिसे निर्धारित वेबसाइट पर छात्रों के उपयोग के लिए डाला जाएगा।
अम्बाला जिले में ये हैं एचओएल | जिले में पीकेआर जैन स्कूल एचओएल का लीड कोलोब्रेटर है। एचओएल के तहत इन स्कूलों को इन विषयों पर वीडियो लेक्चर बनाने की जिम्मेदारी है।
स्कूल वीडियो लेक्चर सबजेक्ट
भारतीय पब्लिक स्कूल -सोशल साइंस
केवी नंबर-2 -मैथ
कॉन्वेंट अॉफ जीजस मेरी -इंग्लिश
पीकेआर जैन - साइंस
एसए जैन विजय वल्लभ स्कूल -हिंदी
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