रोहतक में फंसे मजदूर ने गर्भवती पत्नी की हालत खराब होने पर लगाई गुहार, डीपीओ ने दोस्त के परिवार को बताया दर्द तो यूपी के मैनपुरी में पहुंची मदद

(रत्न पंवार)पत्नी को पहला बच्चा होना है और 5 माह का गर्भ है। खून में सेल्स की कमी होने के चलते लगातार हालत क्रिटिकल बनी हुई है। वहीं 70 बरस से ऊपर के बुजुर्ग मां-बाप के पास भी खाने को राशन तक नहीं है।
मुझे भी हलवाई से अपनी तनख्वाह नहीं मिली थी, जाे उनकी मदद कर पाता। फिर सोचा यूपी जाकर अपने परिवार की कुछ मदद कर पाऊंगा। ऐसे में पंजाब के मानसा से लॉकडाउन के बीच ही 28 मार्च को रात तीन बजे पैदल ही उत्तरप्रदेश के मैनपुरी के लिए निकल पड़े। साथ में भाई जयदेव, सुखदेव और भांजा राहुल भी चल पड़ा। सड़क पर कोई देख न लें, इसलिए रेलवे लाइन का रास्ता चुना और करीब ढाई दिन पैदल चलकर राेहतक के लाखनमाजरा के नजदीक खरैंटी स्टेशन पर पहुंच गए। थकावट होने के कारण खरैंटी स्टेशन पर ही रात बिताई, लेकिन जैसे ही सुबह उठे तो ग्रामीणों ने देख लिया और मदद के लिए आटा-दाल-चावल मुहैया करवाए। चाहते तो थे कि पैदल ही फिर से चल पड़े, लेकिन सख्ती होने के चलते किसी ने जाने नहीं दिया और प्रशासन की ओर से गुरुद्वारा लाखनमाजरा में ठहरा दिया गया।

आपबीती सुनाते हुए हरिओम की आंखे भर आईं

यह आपबीती सुनाते हुए हरिओम की आंखे भर आईं। रोते हुए उसने यह व्यथा काउंसिलिंग के लिए गईं महिला एवं बाल विकास विभाग की डीपीओबिमलेश कुमारी को बताई। बिमलेश कुमारी ने उसकी मदद करने की ठानी। उन्होंने फरीदाबाद में सीडीपीओ तैनात अपनी बैच मैट मंजू वर्मा को फोन किया। मंजू वर्मा के पति मदन वर्मा एटा में मुख्य विकास अधिकारी हैं। मदन वर्मा ने व्हाट्सएप पर लिखित अपील मिलने पर सीएमओ से बात कर एक मेडिकल टीम हरिओम के घर भिजवाई। अपनी तरफ से दो सप्ताह का सूखा राशन भी भिजवा दिया। साथ ही वहां की एएनएम को तैनात किया कि परिवार को परेशानी आने पर तत्काल मदद दी जा सकें।

मालिक ने वेतन नहीं दिया ताे पैदल ही चल पड़ा
हरिओम बताता है कि वे पंजाब के मानसा में हलवाई की दुकान पर काम करते थे। 15 मार्च से ही वेतन मांग रहे थे, लेकिन मालिक करीब 18 और कभी 20 मार्च को देने की बात करता रहा। 21 को पंजाब में लॉकडाउन हो गया तो मालिक ने बात करनी ही बंद कर दी। इसके बाद से काेई मदद न मिलने पर ही पैदल चलने का फैसला लिया था।

  • हरिओम से 13 अप्रैल को मिली तो वह दुखी था। एक घंटे तक काउसंलिंग के बाद समस्या पता चली। उसकी मदद की प्लानिंग की और अपनी दोस्त मंजू वर्मा के जरिए मदद पहुंचाई। बस मन में मदद करने की ठान ली तो इसमें सफल रहे।बिमलेश, डीपीओ, महिला, बाल विकास विभाग
  • मेरे पास बिमलेश का फोन रात में आया तो पति ने एटा में बात कर मदद की प्लानिंग बनाई। अब मेडिकल टीम भी हरिओम की पत्नी रौली की मदद कर रही है। पूरी चिकित्सा मिल रही है। पति ने आर्थिक मदद भी की है।मंजू वर्मा, सीडीपीओ, फरीदाबाद


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The trapped laborer in Rohtak pleaded for the condition of the pregnant wife, the DPO told the friend's family that the pain reached in Mainpuri in UP


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