लाॅकडाउन में संयम का खुशनुमा अहसास निखरी पाैधों-पानी की रंगत, सुधरी आबोहवा

आज अर्थ डे है। विश्वभर के 192 देश इसे पर्यावरण बचाने के लिए एक संकल्प के रूप मनाते हैं। पिछले करीब 27 दिन से लॉकडाउन के चलते पर्यावरण में सुधार दिख रहा है। जल, जमीन, वायु और पेड़ सबकी शुद्धता वाली रंगत लौट रही है। शहर की एयर क्वालिटी सुधर गई है। नहराें में भी पानी इतना साफ है तलहटी में क्रिस्टल साफ नजर आने लगे हैं। फिलहाल 3 मई तक लॉकडाउन के दौरान आप संयम बरतें, घर में ही रहें। सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक संक्रमण से बचाव के लिए एहतियात बरतें। वहीं हालात सामान्य होने के बाद भी पर्यावरण बचाएं, ताकि आपके सांसों को मिले शुद्ध हवा।

सर्वे में हुआखुलासा पाैधाें की शक्ल ही निखर गई

वन विभाग के अधिकारियों द्वारा कराए सर्वे में खुलासा हुआ है कि लॉकडाउन के दौरान जहां पौधों की शक्ल निखर गई है। बारिश के कारण रंगत भी आ गई है। यही नहीं पेड़-पौधों की तंदुरुस्ती भी बढ़ी है। हालांकि अभी सर्वे चल रहा है। वन विभाग जहां पेड़ पौधों की तंदुरुस्ती के लिए हर 10वें दिन पानी की बौछारें कराता था। अब पानी की बौछार कराने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।

3 उदाहरणों से समझिए, लॉकडाउन में कैसे कम हुआपाॅल्यूशन, मिली शुद्ध हवा

1. तेल की खपत घटी

लाॅकडाउन से पहले हर दिन हिसार जिले में करीब 3 लाख लीटर डीजल की खपत हाेती थी जाेकि इन दिनों करीब 1 लाख लीटर रह गई। ठीक ऐसा पेट्राेल काे लेकर जाे पहले 1 लाख लीटर थी, इन दिनों ये खपत केवल 15 हजार लीटर पर पहुंच गई है। यानी सड़काें पर 90 प्रतिशत वाहन नहीं दाैड़ रहे।

2. एयर क्वालिटी में सुधार

एयर क्वालिटी में हिसार जिला की आबाेहवा कई बार दिल्ली के बराबर हो जाती है। लाॅकडाउन से लेकर अब तक हिसार की हवा लगभग ठीक रही है। यहां कि एयर क्वालिटी इंडेक्स के हिसाब से करीब 500 तक पहुंच जाती है। शहर की एक्यूआई मंगलवार काे केवल 52 थी जाे संताेषजनक रही।

3. निर्मल जल

लाॅकडाउन के बाद नहराें में आने वाला पानी निर्मल हो गया है। क्याेंकि नदियाें का पानी साफ आरहा है। नदियाें में फैक्ट्रियाें इत्यादि का डाला जा रहा पाॅल्यूटेड वाटर अब मिक्स नहीं हो रहा। इसका कारण फैक्ट्रियाें का बंद हाेना है। अन्य साेर्सेज जिनसे नहराें में पानी गंदा हो जाता था जिसमें पकड़े धाेना, नहाना व पशुओंकाे नहलाने के मामले पर फिलहाल ब्रेक है।

8 लाख पौधे जल्द लगाए जाएंगे : डीएफओ

जिलेभर के विभिन्न स्थानों पर करीब 5 लाख पौधे लगाए गए हैं। सर्वे कराया गया तो सामने आया कि लॉकडाउन और बारिश के चलते पौधे और पेड़ भी तंदुरुस्त नजर आ रहे हैं। जो पृथ्वी के लिए अच्छा संकेत है। जल्द ही शीशम, नीम, अशोक के 8 लाख पौधे जिलेभर के विभिन्न स्थानों पर लगाए जाएंगे। लोगों से भी पौधरोपण करने की अपील की है।'' - भूपेंद्र सिंह, डीएफओ, वन विभाग।



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A pleasant feeling of sobriety in the lockdown is a flourishing water-color, improved climate


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