(रत्न पंवार)भविष्य काे सुरक्षित करने के लिए जमा करवाई जाने वाली भविष्य निधि यानी पीएफ की राशि कोरोना काल में हजारों कर्मचारियों के लिए मदद का जरिया बनी। सरकार ने कोरोना में वेतनभोगियों को राहत देने के लिए नए नियम 68 एल थ्री के तहत 75 प्रतिशत तक पीएफ की राशि मात्र 3 दिन में निकलवाने का प्रावधान किया। इसके तहत हरियाणा के 2 लाख 23 हजार कर्मचारियों ने कोरोना का हवाला देते हुए पीएफ निकलवाने के लिए आवेदन किया।
इनमें से 1 लाख 41 हजार कर्मचारियों को 377 करोड़ रुपए पीएफ दिया जा चुका है। पिछले वर्ष मार्च से जून तक 1.03 लाख कर्मचारियों ने शादी, मकान निर्माण व शिक्षा आदि के लिए पीएफ निकलवाने का आवेदन किया था। इस बार देखें तो कोरोना में मदद मांगने वाले ही इससे दोगुना से ज्यादा हैं। राज्य में करीब एक लाख लोगों ने अन्य कारणों से भी पीएफ निकासी के लिए अप्लीकेशन दिया है।
पूरे देश की बात करें तो इस वित्त वर्ष में 61 लाख ने पीएफ का पैसा निकाला है। आम दिनों में यह संख्या इसकी आधी भी नहीं होती। हर कार्यदिवस पर लगभग 80 हजार कर्मचारी पीएफ का लगभग 270 करोड़ रुपए निकलवा रहे हैं। पीएफ का 75% पैसा एक साथ मिल जाने की वजह से इन वेतनभोगियों ने कोरोना में राहत की सांस ली।
पीएफ निकलवाने वालों में 74% वे लोग जिनकी सैलरी 15 हजार से कम
कोरोना काल में पीएफ निकलवाने वालों में 74 फीसदी वह कर्मचारी हैं, जिनकी सैलरी 15 हजार से कम है। 15 हजार से 50 हजार रुपए सैलरी वाले 24 प्रतिशत हैं, जिन्होंने पीएफ निकलवाया है। वहीं, 50 हजार से ज्यादा सैलरी वाले 2 फीसदी लोगों ने भी पीएफ निकलवाया है। इससे पहले सामान्य क्लेम के लिए 20 दिन का समय तय किया गया था, लेकिन कोविड-19 के लिए मात्र 72 घंटे तक के समय में इसे निपटाया गया।
मंत्रालय के डेशबोर्ड पर इसकी रोजाना मॉनिटिरिंग भी की जाती रही। कई कोविड-19 के केस में ताे अगले दिन ही उसे सेटल भी किया जाता रहा ताकि कोरोना वायरस की समस्या को लेकर जूझ रहे कर्मचारियों को तत्काल राहत मिल सके। लॉकडाउन में केवाईसी वाले अकाउंट के आवेदन में 72 घंटे के अंदर प्रक्रिया पूरी की गई।
ईपीएफओ के किस जोन में कौन सा जिला
- राेहतक जाेन : राेहतक, झज्जर-बहादुरगढ़, चरखी-दादरी, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी और जींद शामिल हैं।
- गुरुग्राम जोन : गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनाैल, मेवात और नूंह शामिल हैं।
- फरीदाबाद जोन : फरीदाबाद, पलवल शामिल हैं।
- करनाल जोन : सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर, अंबाला शामिल हैं।
आर्थिक तंगी के चलते निकाला पीएफ का पैसा : गाैरव
स्वास्थ्य विभाग में लैब अटेंडेंट गौरव राठी कहते हैं कि उन्हें डेली वेजेज पर वेतन मिलता है। लॉकडाउन के दौरान सबकुछ बंद हो गया था और खाने तक के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में 75 फीसदी क्लेम लिया। यह मात्र तीन दिन में ही मिल गया।
मेरी नौकरी चली गई तो गुजारा मुश्किल था : आनंद
पानीपत के आनंद कहते हैं कि कोरोना के चलते फैक्ट्री बंद हुई तो नौकरी छूट गई थी। गुजार आसान नहीं था तो सोचा कि बुरा दौर पीएफ निकाल कर ही क्यों न काट लूं। इसलिए पीएफ से कुछ पैसा निकाल लिया।
समाजसेवा व जरूरताें के लिए पैसा निकाला : अजय
आईटी कंपनी में काम करने वाले अजय आसरा ने कहा कि पहली बार लॉकडाउन हुआ तो इसमें समाज सेवा और खुद की जरूरत के लिए तीन दिन में ही 75 फीसदी ही क्लेम ले लिया। अक्सर एक महीना क्लेम लेने में लग जाता था।
अब भी चालू है यह योजना, : रीजनल कमिश्नर
कोरोना में लॉकडाउन के बीच वेतनभोगी लोगों को प्राेविडेंट फंड अकाउंट से पैसा निकालने की सुविधा प्रदान की गई। मार्च में प्रावधान 68 एलथ्री के इस फैसले की घोषणा की गई थी। इसके तहत कोई भी कर्मचारी अपने पीएफ की राशि से 75 फीसदी राशि निकलवा सकता है। इसमें ईपीएफओ के कर्मचारी बेहतर कार्य करते हुए तत्काल क्लेम सेटल कर रहे हैं। यह योजना चालू है, अभी कर्मचारी इसका लाभ ले सकते हैं।- सुब्रतो भौमिक, रीजनल कमिश्नर टू, ईपीएफओ।
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