सरिता शर्मा
सभी देवियां मिलकर आईं
सबकी रक्षा करने आई
किरण जैन
रोज गहरी हो रही है दर्द की नदी, क्या-क्या दिखा रही है 21वीं सदी
दीया शर्मा-
महामारी को भगाना है
सृष्टि को सुरक्षित बचाना है।
अंजलि ‘सिफ़र’
नहीं है रात की क़िस्मत में सूरज की किरण माना
मगर तारों का भी तो जगमगाना कम नहीं होता
एकता डांग
काव्य जगत में रखकर कदम एक नया इतिहास बनाना चाहती हूं
सुनीला विग
सखी। डर मत, कुछ नया कर।
नया संवत!! देखो फिर आ गया।।
आशी कौशिक
कोरोना ने ऐसा कहर मचाया है
सब को घर मे बंद करवाया है
शिवानी दीक्षित
ना कोई बांधने की चाहत ना कोई प्यार में टूटने की चुभन... बस ऐसा ही प्यारा होता है यह मन से मन का बंधन ..
गौरी वंदना
नहीं जाने दूंगी बाहर अपने घर को और मन को भी।
ताकि कर ना सके वार कोरोना घर पर और मन पर भी।
ममता शर्मा
मिलकर इस रक्तबीज का करेंगे हम संहार
भारत की इस जीत में हम सब हैं तैयार
जतिंदर ‘जेके’
न चाह ,न तमन्ना ,न कोई अरमान
दिल अब हमारा बे परवाह हो गया
नीरजा रजनीश जयसवाल
नैतिक मूल्यों का हो रहा ह्रास
मर्यादाओ का यहाँ होता उपवास
मनीषा नारायण
कहो कौन माता पिता, के समान है मीत।
नित प्रति तुम सेवा करो, करके गहरी प्रीत।
कनिका शर्मा
कि मेरी गुमनामियों का मुझे जवाब नहीं मिलता
कि सिसकी सा निकलता है पर घाव नहीं मिलता
संगीता भसीन
हम में भी है कुछ बात तभी तो
जमाना नतमस्तक है आज
सबीना सवी
बाद जमाने के संवरी है, महफिल इस तन्हाई की
ऐसे आलम में बतलाओ कैसे उठ कर जाएं हम
अॉनलाइन काव्य गोष्ठी
मनजीत कौर
कुछ दिन अकेले रहो, ना जाओ
उत्सवों और मेलों में
एक दूसरे से दूरी बना लो,
ना घूमो बसों और रेलों में
कंचन बाला
मिलकर हम कुछ कदम उठाएं।
प्रकृति को बचायें
दिव्या भसीन कोचर
कोरोना पर यूं सभी, मिलकर करें प्रहार
कुछ दिन बस घर पर रहें, आप संग परिवार।
पायल बेदी
लोगों की सोच को दीमक खा गए
जमा घटाओं और गुणा खा गए
अम्बाला | कोरोना संकट के बीच महिला काव्य मंच की अम्बाला इकाई ने ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। रचनाओं में भी कोरोना और लॉक डाउन जैसे मुद्दे रहे। वाट्सएप समूह 20 कवयित्रियों ने रचनाएं पेश की। गोष्ठी का संचालन अध्यक्ष अंजलि सिफ़र ने गया।
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