अष्टमी अाैर नवमी पर कंजक पूजन एेसे करें इस बार


ज्याेतिषी गिरीश अाहूजा

अम्बाला | वैसे तो नवरात्रि के सभी 9 दिन में देवी स्वरूप कन्या के पूजन का विधान है, लेकिन अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। जो इस बार चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी 1 अप्रैल बुधवार आद्रा नक्षत्र सुबह 6:10 से 9:18 तक व 10:51 से दोपहर 12:25 तक कंजक पूजन करने का शुभ मुहूर्त होगा।

रामनवमी वीरवार काे पुनर्वसु नक्षत्र को होगी। वैसे ताे कन्या पूजन के लिए अष्टमी व नवमी के दिन 9 कन्याओं व एक बालक काे भैराें रूप में घर में बुलाकर पूजा की जाती है लेकिन काेराेना वायरस की महामारी की वजह से सभी को कन्या पूजन नहीं करना चाहिए। यदि घर में 12 वर्ष से कम आयु की कन्या व बालक हो जैसे सभी के घर में एक बेटा-बेटी आजकल होती ही हैं उन दोनों को बिठाकर मां भगवती के रूपों का ध्यान करते हुए कन्या को नव दुर्गा का रूप मानकर वह बालक को भैरव रूप मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले उनके पैर धुलवाकर और साफ स्थान पर उचित आसन देकर पंक्ति में बैठा दें। उन्हें कुमकुम से तिलक लगाएं और फिर कलाई पर कलावा (मोली) बांधें। पूजन पूरा होने के बाद उन्हें हलवा, पूरी और चना भोग के रूप मे दें व अपनी सामर्थ्यानुसार कोई भेंट और दक्षिणा दें। परिवार के सभी सदस्य पैर अवश्य छुएं और उनसे आशीर्वाद लें। यदि किसी के घर में 12 वर्ष की छोटी कन्या और बालक नहीं है तो वह मां दुर्गा की पूजा कर उन्हें भोग लगाकर 2 पूरी गाय, 1 कुत्ते अाैर 1 पक्षी के नाम निकालकर जाे प्रसाद बनाया है उसे रखकर हाथ जाेड़कर उन्हें खिला दें।



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