मां महागौरी की कहानी और पूजा का क्या है महत्व


अष्टमी के दिन कन्या पूजन विधि

अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है। कन्या पूजन के दौरान कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए अन्यथा 2 ही कन्याओं का पूजन करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन करते समय कन्याओं की आयु 2 साल से ऊपर और 10 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। कन्या पूजन के बाद उन्हें भोजन करवाकर दक्षिणा भी देनी चाहिए।


मां महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया।

जया उमा भवानी जय महामाया॥

हरिद्वार कनखल के पासा।

महागौरी तेरी वहां निवासा॥

चंद्रकली ओर ममता अंबे।

जय शक्ति जय जय माँ जगंदबे॥

भीमा देवी विमला माता।

कौशिकी देवी जग विख्यता॥

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।

महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥

सती सत हवन कुंड में था जलाया।

उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।

तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥

तभी मां ने महागौरी नाम पाया।

शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता।

मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।

महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो॥

यह कटिंग घर में रखकर पूजा करें

आज आठवां नवरात्र, पढ़ें...

प्रसाद में लगाएं इन चीजों का भोग


झावरियां वाला मंदिर, अम्बाला सिटी

मां शक्ति के इस स्वरूप की पूजा में नारियल, हलवा, पूड़ी और सब्जी का भोग लगाया जाता जाता है। आज के दिन काले चने का प्रसाद विशेषरूप से बनाया जाता है।

आठवां नवरात्र यानी दुर्गाष्टमी का दिन। इस दिन मां महागौरी की पूजा का विधान है। मां दुर्गा का ही आठवां रूप है महागौरी। कहते हैं कि मां महागौरी की पूजा से मनचाहे विवाह का वरदान भी प्राप्त हो कसता है। वहीं मां भक्तों के आर्थिक संकट भी दूर करती हैं और मनोवांछित फल भी प्रदान करती हैं। दुर्गाष्टमी पर महागौरी की पूजा पूरे विधि-विधान से करना जरूरी होता है इसलिए पूजा से पहले जान लें कि पूजा कब, कैसे और किस विधि से करनी है ताकि बाद में आपसे कोई गलती न हो। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महागौरी को शिवा नाम से भी पहचाना जाता है। महागौरी के एक हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशूल तो दूसरे हाथ में भगवान शिव का प्रतीक डमरू है। बात अगर मां के सांसारिक रूप की करें तो महागौरी उज्ज्वल, कोमल, श्वेत वर्णी तथा श्वेत वस्त्रधारी और चतुर्भुजा हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू है तो तीसरा हाथ वरमुद्रा में हैं और चौथा हाथ एक गृहस्थ महिला की शक्ति को दर्शाता हुआ है। महागौरी को गायन और संगीत बहुत पसंद है।

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