कोविड-19 अस्पताल घोषित होने के दूसरे दिन ही एनआईटी-3 स्थित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पातल में करीब 45 जूनियर रेजिटेंड डॉक्टरों ने हंमागा कर दिया। वह एन-95 मास्क, पसर्नल प्रोटक्सन इंक्यूपमेंट (पीपीई) आदि के साथ तय वेतनमान के तहत सैलरी नहीं मिलने की मांग कर रहे थे और हाथ पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जता रहे थे।
एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. कमल ने बताया कि जूनियर डॉक्टर फ्रंट पर रहते हैं। किसी बीमारी से पीड़ित मरीजों का उपचार वह सबसे पहले करते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा। उन्हें पीपीई के साथ एन-95 मास्क, सेनेटाइजर आदि नहीं दिए गए हैं। उन्हें तय वेतनमान के तहत सैलरी भी नहीं मिल रही है।
जो सैलरी मिल रही है वह भी लेट मिलती है। इससे उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का यह भी कहना है कि वह इन सुविधाओं की मांग करते हैं तो कॉलेज के डीन उन्हें टर्मिनेट करने की धमकी देते हैं और दुव्यवहार करते हैं। जबतक डीन जुनियर रेजिडेंट्स डॉक्टरों से लिखित में माफी नहीं मांगेगे, तबतक सभी हाथ पर काली पट्टी बांधकर काम करेंगे।
यह कहना है डीन का
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डीन डॉ. असीम दास ने बताया कि उन्होंने अपने अस्पताल में कार्यरत सभी 1200 कर्मचारियों में कपड़े वाली मास्क, 500 एम.एल की सेनेटाइजर बोतल आदि वितरित किए हैं। अभी प्रबंधन के पास स्टॉक में 2 हजार पीपीई, 4 हजार एन-95 मास्क व 60 हजार थ्री-लेयर सर्जिकिल फेस मास्क के साथ 1 हजार के आसपास सेनेटाइजर हैं। आईसीएमआर के कुछ प्रोटोकॉल हैं। एन-95 मास्क उन डॉक्टरों व कर्मचारियों को दिया जाता है, जिनमें कोरोना मरीज की जांच के दौरान संक्रमण फैलने का डर रहता है। जरूरत के अनुसार मास्क और पीपीई सभी को दिए जाते हैं। इसलिए जुनियर रेजिडेंट्स डॉक्टरों का आरोप गलत है। साथ ही महामारी के दौरान वह वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं, वह भी गलत है। महामारी से निपटने के बाद इस पर बात की जा सकती है। जुनियर डॉक्टरों द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
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