हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम का जन्मोत्सव रामनवमी महापर्व के रूप में मनाया जाता है। रामचंद्र का जन्म पुनर्वासु नक्षत्र मध्याह्न व्यापिनी चैत्र नवमी तिथि में हुआ था जो 2 अप्रैल को पुनर्वसु नक्षत्र में है। इसका शुभ मुहूर्त सुबह 11:10 से दोपहर 1:38 बजे तक है। इस दाैरान अस्त्र-शस्त्र की पूजा होगी।
भगवान राम को विष्णु के 7वें अवतार के रूप में जाना जाता है। त्रेतायुग में रावन के अत्याचारों को समाप्त करने और धर्म को पुनः स्थापित करने के लिए भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर मनुष्य के रूप में राम अवतार लिया था। इस दिन स्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग अाैर रवि योग भी होगा। जो शिक्षा साधना सिद्धि एवं नवीन कार्याें के लिए विशेष महत्व एवं सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। काेराेना वायरस महामारी के दौरान रामनवमी का पर्व हमें इकट्ठे होकर नहीं बल्कि अपने घरों पर बैठकर मनाना चाहिए और रामचंद्र का भजन व गुणगान करना चाहिए। एस्ट्रोलॉजर गिरीश आहूजा के अनुसार महामारी के दौर में रामनवमी पर प्रदेशवासी लॉकडाउन का पालन करते हुए अगर बेसहारा, बेघर और जरूरतमंद बच्चियों को खाना बांटेंगे तो यह सही मायने में समाजसेवा होगी।
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