कोरोना से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग का हर कर्मचारी अपना योगदान दे रहा है। चिकित्सकों के लिए तो टाइम भी फिक्स नहीं किया गया। आपातकालीन स्थिति में अस्पताल में ही रहना पड़ता है। इसके चलते ड्यूटी अवधि लंबी हो जाती हैं। ऐसी ही हैं बिलासपुर सामुदायिक केंद्र की सीनियर मेडिकल आफिसर डॉ. शमा प्रवीण, टीम लीडर होने के कारण ज्यादा जिम्मेदारी इनके पास है। कई घंटे की ड्यूटी के बाद अस्पताल से घर जाती है तो मोबाइल पर संपर्क में रहती हैं। पहले से और अब में कॉल की संख्या तीन गुना बढ़ चुकी है।
डॉ. शमा बताती हैं कि चिकित्सकों को धरती पर भगवान का दर्जा लोग देते हैं। उनसे ही इस समय सबको उम्मीद है कि ये सब ठीक कर देंगे। इसी विश्वास को जीतने के लिए परिवार की परवाह भी नहीं कर रही हैं। वे अकेली ऐसी चिकित्सक नहीं हैं और भी ऐसे डॉक्टर है जो दिनरात मरीजों की सेवा में लगे हैं। उनके एरिया के साथ लगते दो गांवों में विभाग की टीम ने डेरा डाला हुआ है, जब से हिमाचल प्रदेश के सिरमोर का कोरोना पॉजिटिव मिला है पता लगा कि इन गांवों से संपर्क रहा है। तब से उनका सारा फोकस वहीं पर है। टीम इन गांवों में लगाई हुई है जो स्क्रीनिंग कर रही है। हर व्यक्ति के स्वास्थ्य की जांच हो रही है। इनके बारे में रिकाॅर्ड भी रखा जा रहा है। इसमें आशा वर्करों से इनकी ट्रैवल हिस्ट्री पूछी जा रही है। दो से तीन माह के दौरान कहां थे, कब लौटे हैं। प्रयास यही है कि उनके स्तर पर कहीं कोई लापरवाही न बरती जाए।
इसलिए घर से पैदल आती हैं अस्पताल
लॉकडाउन में बहुत से लोग बेवजह बाहर आ रहे हैं। इनको नहीं पता कि वैश्विक महामारी फैली हुई है। उसके बाद भी लोग लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसे लोगों को जागरूक कर सकें इसके लिए घर से पैदल ही ड्यूटी पर आती हैं। जो लोग उनकी मानते हैं ठीक है, नहीं तो उनकी शिकायत पुलिस को देती हैं। उनका मानना है कि छोटा प्रयास अगर व्यक्ति करें तो इस महामारी से बचाव संभव है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2Rx9zrT
via IFTTT