(मनोज कुमार)राज्य में कोरोना प्रभावित गांवों में शहरों इलाकों में पूरी तरह पुलिस और प्रशासन का पहरा लगा दिया है। न तो कोई गांव से बाहर जा सकता है और न ही प्रवेश कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति गांव का ही बाहर से आता है तो उसकी का पूरा रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा। साथ ही सरपंच इसकी सूचना जिला प्रशासन को दे, ताकि हर आने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पूरी नजर रहे। साथ ही उसकी स्क्रीनिंग की जाएगी। राज्य में 287 गांव और कॉलोनियों को कंटेनमेंट और बफर जोन घोषित किया है, जिन्हें पूरी तरह सील किया जा चुका है। राज्य सरकार पूरे राज्य के सभी गांवों में पहले ही ठीकरा पहरा देने के आदेश दे चुकी है। इसके तहत भी ग्रामीण गांवों में प्रवेश करने वाले रास्तों पर पहरा दे रहेे हैं, ताकि कोई भी गांव से भी गुजरता है तो उस पर नजर रखी जा सके। इन गांवों और कॉलोनियों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी सर्वे करेंगे। डीजी हेल्थ एसबी कंबोज का कहना है कि डीसी ने अपने स्तर पर गांवों को कंटोनमेंट और बफर जोन कर सील करने की योजना बनाई है। गांवों में आने वाले का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा।
कहां कितने गांव किए सील
नूंह जिले में सबसे 140 गांवों को सील किया गया है, जबकि पलवल में 28, सोनीपत में 3, करनाल में दो, फरीदाबाद में 13, भिवानी में 2, चरखी दादरी में 7, गुड़गांव में 9, जींद में सात, फतेहाबाद में 2, पानीपत में दो, कैथल में एक, पंचकूला में 21 और सिरसा में तीन गांव सील किए हैं।
कर्मचारियों के लिए सुरक्षा कवच की कमी नहीं: विज
सरकार ने दावा किया कि कोरोना मरीज से लड़ने में जुटे कर्मचारियों के लिए सुरक्षा कवच पर्याप्त मात्रा में है। स्वास्थ्य मंत्री विज ने कहा कि अस्पतालों में 3-प्लाई मास्क, हैंड सेनिटाइजर, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन 200 एमजी, एन-95 मास्क, पीपीई किट और वीटीएम मीडिया समेत आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की कोई कमी नहीं है। प्रदेश में इस समय 13,147 पीपीई किट हैं, जबकि 4,88,887 किट की सप्लाई पाइप लाइन में हैं, जो जल्द पहुंच जाएंगी।
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