वरूण चाैधरी
बराड़ा | विधायक ने सरकार और आढ़ती के बीच लॉकडाउन खत्म करने का समर्थन करते हुए कहा कि किसान और आढ़ती एक दूसरे के पूरक हैं। आढ़ती को अक्सर किसानों के एटीएम के रूप में जाना जाता है जोकि लाइसेंस प्राप्त कमीशन एजेंट हैं। इन दिनों सोशल डिस्टेंसिंग का प्रयोग लगभग हर व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। वहीं सरकार कमीशन एजेंटों के बिना ही गेहूं खरीदने की योजना बना रही है जिन्होंने न केवल अपने लाइसेंस प्राप्त किए हैं, बल्कि अनाज मंडियों में नीलामी की दुकानें भी कर रखी हैं। यदि किसी किसान को खेती के लिए या व्यक्तिगत किसी काम के लिए धन की आवश्यकता होती है तो कोई बैंक या कोई अन्य एजेंसी उसका समर्थन करने के लिए आगे नहीं आती है। यही कारण है कि किसान आढ़ती को परिवार का एक विस्तारित परिवार सदस्य माना जाता है। सहकारी बैंक और लैंड मोर्टगेज बैंक के खराब वित्तीय स्वास्थ्य को देखते हुए, किसान समुदाय की सहायता प्रणाली से आढ़ती को बाहर करना उचित नहीं है।
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