20 जुलाई तक कर सकते हैं अरंड की बिजाई कम लागत में अधिक मुनाफा देती है इसकी खेती

अरंड भारत की एक महत्वपूर्ण एवं व्यवसायिक अखाद्य तिलहन फसल है। इसके क्षेत्रफल एवं उत्पादन में देश का विश्वभर में प्रथम स्थान है। गुजरात, राजस्थान एवं आंध्रप्रदेश के साथ अब हरियाणा में भी अरंड की खेती को बढ़ावा मिला है। जिनमें राज्य के राजस्थान के साथ लगते जिले सिरसा, हिसार के बाद अब रेवाड़ी और फतेहाबाद में भी इसकी खेती की तरफ किसानों का रुझान हर साल बढ़ रहा है। राज्य में अरंड परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी खेती कम सिंचित एवं पूर्ण सिंचित, मरगोझा व सरसों में तना गलन प्रभावित क्षेत्रों में की जा सकती है। इसमें कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

यह है उन्नत किस्में या हाइब्रिड

अरंड परियोजना से जुड़े मुख्य अन्वेषक एवं क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र बावल में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जोगिंद्र यादव ने बताया कि हरियाणा में अरंड का मुख्य अनुसंधान केंद्र बावल है। यहां उन्नत किस्म के लिए रिसर्च होता है। इनकी उन्नत किस्म में बारानी एवं कम सिंचित किस्में जैसे डीसीएच-177 है। इसके अलावा सिंचित एवं उच्च आदान प्रबंधन किस्में जैसे, जीसीएच-7, डीसीएच-177 एवं डीसीएच-519, आईसीएच-66, जीसीएच- 8 व 9 शामिल हैं।

बिजाई का यह समय उपयुक्त

अरंड की बिजाई का सर्वोत्तम समय जुलाई के पहले सप्ताह से लेकर 20 जुलाई माना गया है। लेकिन जुलाई के अंत तक बिजाई अवश्य पूरी कर लें। बाद की बिजाई में सर्दी का प्रकोप अधिक होने से उत्पादन कम हो जाता है। इधर, अरंड के साथ मूंग, ग्वार, मूंगफली, तिल, कपास, अरहर, मोठ, टमाटर, मिर्च, अगेती मेथी, धनिया, मूली व गाजर की अन्त: फसल पद्धति विभिन्न राज्यों में प्रचलित है।

जानिए...बीज की मात्रा एवं बिजाई की विधि

  • बारानी एवं कम सिंचित क्षेत्रों के लिए 90-120 सेमी. गुणा 60 सेमी. बिजाई के लिए 2 से 3 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ का उपयोग करें।
  • सिंचित क्षेत्रों के लिए 150 सेमी. गुणा 90 सेमी. तथा 1 से डेढ़ किलोग्राम बीज प्रति एकड़ प्रयोग करें। बीज की गहराई 2 से 3 इंच रखें। वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार बीज उपचार के बाद ही बिजाई करें।
  • इसके अलावा खेत को तैयार करते समय पहले 12 किलोग्राम सल्फर, 4 किलोग्राम जिंक (33%) और 30 किलोग्राम पोटास को मिलाकर खेत तैयार करें। वहीं इसके बाद 50 किलोग्राम डीएपी का इस्तेमाल करें। इसके अलावा अगर अंत: फसलों की बिजाई करनी है तो अरंड की बिजाई करते समय लाइनों की दिशा भी उत्तर-दक्षिण में होनी चाहिए।

ऐसे करें खरपतवार नियंत्रण

बिजाई के चौथे एवं सातवें सप्ताह में दोे निराई-गुड़ाई करने से खरपतवार नियंत्रण हो जाता है। कपास की तरह अरंड में भी ट्रैक्टर, बैलों या ऊंट से निराई-गुड़ाई की जा सकती है। इसके अलावा बिजाई के बाद लेकिन फसल उगने से पहले वैज्ञानिक सलाह अनुसार दवाई का छिड़काव करने से भी खरपतवार नियंत्रण हो जाता है। बिजाई के 35 से 40 दिन बाद उगे खरपतवारों को हाथ से निकाल देना चाहिए।

यहां करें फसल की बिक्री

अरंड के तेल की निर्यात मांग एवं घरेलू खपत के कारण इसके भाव में निरंतर वृद्धि हो रही है। राज्य में हिसार, आदमपुर, सिरसा, ऐलनाबाद के बाद इस वर्ष रेवाड़ी की नई अनाज मंडी में भी इसकी खरीद शुरू हुई है। इसके अतिरिक्त राजस्थान के नोहर-भादरा और गुजरात में भी बिक्री होती है।




Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2ZPeKH4
via IFTTT